बिहार से पंजाब तक महिला नेताओं ने ‘महिला आरक्षण बिल’ को बताया ऐतिहासिक

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नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश तक, महिला नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया है। बिहार के बेतिया से मेयर गरिमा देवी सिकारिया ने इस बिल का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि 2029 के चुनाव से पहले इस बिल को पास करने की पहल सराहनीय है और वह इसका पूरा समर्थन करती हैं।…

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश तक, महिला नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

बिहार के बेतिया से मेयर गरिमा देवी सिकारिया ने इस बिल का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि 2029 के चुनाव से पहले इस बिल को पास करने की पहल सराहनीय है और वह इसका पूरा समर्थन करती हैं।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह ने भी प्रधानमंत्री की सोच और महिलाओं के प्रति सम्मान की तारीफ की। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी में भी अब नई कमेटी में कम से कम सात महिलाओं को शामिल करने का प्रावधान किया गया है।

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा की सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सबीहा भट ने कहा कि वह खुद चुनाव लड़ चुकी हैं और अगर महिलाओं के लिए सीटों की संख्या बढ़ती है, तो यह महिलाओं के लिए बहुत अच्छा कदम होगा। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण में बढ़ोतरी एक स्वागत योग्य फैसला है।

झारखंड के चाईबासा से ‘सृजन महिला विकास मंच’ की सचिव नरगिस खातून ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 2029 को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह फैसला बेहद मजबूत और सराहनीय है।

वहीं, जम्मू-कश्मीर के बारामुला से जेकेएनसी की महिला विंग की जिला अध्यक्ष और बार एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलोफर मसूद ने जानकारी दी कि महिला आरक्षण बिल पहले ही 2023 में पारित हो चुका था। उन्होंने बताया कि 2 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने सत्र को तीन दिन और बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था ताकि इस बिल को आगे बढ़ाया जा सके और इसमें जरूरी संशोधन जोड़े जा सकें।

पंजाब के पटियाला से अकादमी लेक्चरर नेहा ने इस कदम को महिलाओं को सशक्त बनाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति’ का नारा अब और मजबूती से आगे बढ़ेगा। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर हरलीन कौर ने इसे भारत के लोकतंत्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्व वाला बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उनके अनुसार इससे महिलाओं की भागीदारी निर्णय लेने की प्रक्रिया में बढ़ेगी, जिससे शासन और नीतियों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

पटियाला की ही उद्यमी मोनिका राजपूत कथूरिया ने कहा कि लंबे समय से संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग की जा रही थी। यह महिलाओं के लिए खुशी की बात है कि सरकार ने इतना बड़ा फैसला किया।

छत्तीसगढ़ के बस्तर से सामाजिक कार्यकर्ता राधा राव ने भी इसे एक सकारात्मक और स्वागत योग्य पहल बताया और कहा कि इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से वकील एम. कमला कुमारी ने कहा कि महिलाओं का समाज में योगदान हमेशा से रहा है, लेकिन संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम रहा है। ऐसे में यह कदम बेहद जरूरी और ऐतिहासिक है।

हालांकि, इस पूरे मुद्दे पर एक अलग आवाज भी सामने आई है। आंध्र प्रदेश के अमरावती में ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर महिला आरक्षण बिल में अपने लिए समान अधिकार और शामिल किए जाने की मांग की है।

–आईएएनएस

वीकेयू/वीसी

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