लखनऊ, 18 जुलाई (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई ने शनिवार को विभिन्न राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मौलाना जर्जीस अंसारी विवाद, आजम खान के मामले, ओपी राजभर के बयान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणियों, जौहर विश्वविद्यालय, मौलाना अरशद मदनी के बयान और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के समान नागरिक संहिता (यूसीसी) संबंधी बयान पर पार्टी का पक्ष रखा।
लखनऊ में मौलाना जर्जीस अंसारी के बयान को लेकर भाजपा नेता मनीष यादव द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर अमीक जामेई ने कहा कि मौलाना जर्जीस अंसारी एक गंभीर मामले में जेल जा चुके हैं और उनके ऊपर गंभीर आरोप लगे थे। समाजवादी पार्टी पहले दिन से ही उनकी गिरफ्तारी की मांग करती रही है। किसी भी धर्म के देवी-देवताओं, भगवान या खुदा के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं है और ऐसा व्यवहार न हिंदू समाज को पसंद है और न ही मुस्लिम समाज को। यदि यूपी पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है तो इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण हो सकता है। साथ ही, उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीतिक माहौल बनाने का काम कर रहे हैं।
आजम खान को डीएम पर अमर्यादित टिप्पणी के मामले में दो वर्ष की सजा मिलने पर अमीक जामेई ने कहा कि वह लगभग साढ़े पांच से छह वर्षों से जेल में हैं। उन्होंने उन्हें समाजवादी आंदोलन का बड़ा नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ संघर्ष किया है। जामेई ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था पर प्रशासनिक दबाव का माहौल है। यदि ऐसा दबाव समाप्त हो जाए तो आजम खान को न्याय मिल सकता है। उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और उम्मीद है कि आजम खान को जल्द राहत मिलेगी।
प्रदेश में अपराध की घटनाओं में यादव और मुस्लिम समुदाय की अधिक भागीदारी संबंधी ओपी राजभर के बयान पर जामेई ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि ऐसा लगता है जैसे उनके सोशल मीडिया अकाउंट किसी और के प्रभाव में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ओपी राजभर को अभी भी पीडीए की राजनीति का हिस्सा मानती है और ऐसे बयान समाज में अनावश्यक विवाद पैदा करने वाले हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जनसंख्या संतुलन बदलने तथा जिन्ना की विचारधारा से जुड़ा होने के आरोपों पर अमीक जामेई ने कहा कि सरकार को पहले एसआईटी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रिपोर्ट अभी सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत होनी है तो उसके कथित मुख्य बिंदु मीडिया में कैसे आ रहे हैं। सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए नए-नए राजनीतिक विवाद खड़े कर रही है।
जौहर विश्वविद्यालय को लेकर राजभर के बयान पर अमीक जामेई ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में विश्वविद्यालय को दोबारा विकसित किया जाएगा, चाहे इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपए तक खर्च करने पड़ें। विश्वविद्यालय के खिलाफ जारी ध्वस्तीकरण आदेश असंवैधानिक और अवैध है। जिस समय निर्माण हुआ था, उस समय संबंधित विकास प्राधिकरण अस्तित्व में ही नहीं था, इसलिए वर्तमान नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा कांग्रेस और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास पर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए जामेई ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में विभिन्न वर्गों और समुदायों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि देवबंद के उलेमा, मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली, मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी और राजा महेंद्र प्रताप जैसे अनेक लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने विभाजन के समय मोहम्मद अली जिन्ना का विरोध किया था और भारत के साथ रहने का फैसला किया था।
जामेई ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में समाज में भय और विभाजन का माहौल बनाया जा रहा है, जबकि देश की प्रगति के लिए शांति, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द आवश्यक है। पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष के समय देश के मुसलमान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सेना के साथ मजबूती से खड़े थे।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के एक विवाह और समान नागरिक संहिता से जुड़े बयान पर जामेई ने कहा कि सरकार को किसी एक समुदाय को निशाना बनाने के बजाय सभी नागरिकों के लिए समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। ऐसे बयान केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से दिए जा रहे हैं। सरकार को सामाजिक सौहार्द और विकास के मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि बिना शांति और भाईचारे के देश का समग्र विकास संभव नहीं है।
–आईएएनएस
पीएसके/डीकेपी
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