भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने देश पर थोपे गए आपातकाल के 45 साल पूरे होने पर बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और इसे उसकी ‘‘अधिनयाकवादी’’ मानसिकता का परिचायक करार दिया।
भारत उन सभी महानुभावों को नमन करता है, जिन्होंने भीषण यातनाएं सहने के बाद भी आपातकाल का जमकर विरोध किया।
ये हमारे सत्याग्रहियों का तप ही था, जिससे भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों ने एक अधिनायकवादी मानसिकता पर सफलतापूर्वक जीत प्राप्त की। pic.twitter.com/dhkEmmq18b
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) June 25, 2020
नड्डा ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘भारत उन सभी महानुभावों को नमन करता है, जिन्होंने भीषण यातनाएं सहने के बाद भी आपातकाल का जमकर विरोध किया। ये हमारे सत्याग्रहियों का तप ही था जिससे भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों ने एक अधनियाकवादी मानसिकता पर सफलतापूर्वक जीत प्राप्त की।’’ देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच 21 महीने की अवधि तक आपातकाल लागू रहा। इंदिरा गांधी उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं।
इसके साथ ही नड्डा ने ट्वीटर पर ‘आपातकाल का काला अध्याय’ शीर्षक से एक पोस्ट भी साझा की। इसमें उन्होंने कहा “वर्ष 1975 में आज ही के दिन निहित राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा आपातकाल की घोषणा कर सरकार के खिलाफ बोलने वालों को जेल में डाल दिया गया था, देशवासियों के मूलभूत अधिकार छीनकर अखबारों के दफ्तरों पर ताले लगा दिए गए थे।”
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस द्वारा थोपे गए शर्मनाक आपातकाल की बरसी पर मैं उन सभी राष्ट्रभक्तों को नमन करता हूं जिन्होंने घोर अन्याय व यातनाएं सहने के बावजूद लोकतंत्र की हत्या करने वालों के सामने घुटने नहीं टेके।’’
वहीं इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरूवार को कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र है लेकिन कांग्रेस में नहीं। सत्ता के लालच में एक परिवार ने देश में 45 साल पहले एक परिवार ने आपातकाल लगा दिया था।
अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा, ’45 साल पहले इस दिन सत्ता के लालच में एक परिवार ने देश में आपातकाल लागू कर दिया। रातों रात देश को जेल में बदल दिया गया। प्रेस, अदालतें, मुक्त भाषण, सबकी आवाज को कुचल दिया गया। गरीबों और दलितों पर अत्याचार किए गए।’


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