इंडिया टुडे की खबर के अनुसार छात्रों के एक समूह ने शुक्रवार रात 8 बजे केआरबी ऑडिटोरियम में इस डॉक्यूमेंट्री को दिखाने का प्लान बनाया था। बोर्ड का कहना है कि बिना सर्टिफिकेट या सरकारी छूट के किसी भी गैर-प्रमाणित फिल्म का पब्लिक शो सिनेमाटोग्राफ एक्ट का सीधा उल्लंघन है।
बिना अनुमति के स्क्रीनिंग गैरकानूनी: CBFC
सेंसर बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए साफ किया कि जब तक एक्ट के तहत कोई विशेष छूट न दी गई हो, तब तक बिना सीबीएफसी सर्टिफिकेशन के डॉक्यूमेंट्री दिखाना नियमों के खिलाफ है। बोर्ड ने IIIT-हैदराबाद को टैग करते हुए संस्थान के प्रशासन से इस मामले पर तुरंत ध्यान देने और जरूरी कदम उठाने को कहा है।
Public Screening of a Documentary film that has not yet been Certified by the CBFC is a violation of the Cinematograph Act unless a specific exemption has been sought under the Act. Authorities of @iiit_hyderabad may take note for necessary action. pic.twitter.com/KeZlkbqrFn
— CBFC केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (@CBFC_Bharat) September 17, 2026
निर्माता ललित वाचानी द्वारा निर्देशित यह डॉक्यूमेंट्री उमर खालिद की साल 2020 में हुई गिरफ्तारी और उनकी कानूनी लड़ाई के इर्द-गिर्द घूमती है। खालिद को उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से जुड़ी साजिश के आरोप में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था और वे तब से जेल में ही बंद हैं।
ABVP ने किया था विरोध
हैदराबाद से पहले बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में भी इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रोकी जा चुकी है। वहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कड़े विरोध के बाद कार्यक्रम को टालना पड़ा था।
ABVP के प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन पहुंचकर केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपा था और मांग की थी कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन को आदेश देकर इस फिल्म के प्रदर्शन पर स्थायी रूप से रोक लगाई जाए।
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