जिनेवा, 18 सितंबर (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बलूचिस्तान में हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा दुनिया के सामने रखा। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे कार्यकर्ताओं, छात्रों और लापता लोगों के परिवारों को मनमाने ढंग से हिरासत में ले रहे हैं, उन्हें जबरन गायब कर रहे हैं और उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई कर रहे हैं।
जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र को संबोधित करते हुए हेग स्थित ‘ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस’ (जीएचआरडी) ने कहा, “हम परिषद का ध्यान कब्जे वाले बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट की ओर तुरंत दिलाना चाहते हैं, जहां बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, छात्रों और लापता लोगों के परिवारों को पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से जबरन गायब किए जाने, मनमानी हिरासत और बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।”
संगठन ने बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के नेताओं की लगातार हिरासत का मुद्दा भी उठाया। उसने महरंग बलूच, बीबो बलूच, गुलजादी बलूच और अन्य लोगों की हिरासत को लेकर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रक्रियाओं की ओर से जताई गई चिंताओं का जिक्र किया। साथ ही इनके परिवारों के खिलाफ कथित बदले की कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया।
संगठन ने कहा कि 22 जून 2026 को पाकिस्तान की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने बीवाईसी नेताओं महरंग बलूच और सिबगतुल्लाह शाहजी को उम्रकैद की सजा सुनाई। जीएचआरडी के मुताबिक, यह फैसला जेल में जल्दबाजी में की गई गुप्त सुनवाई के बाद आया, जिसमें हिंसा से उनका सीधा संबंध साबित करने वाला कोई सबूत पेश नहीं किया गया।
बलूच नागरिकों के खिलाफ पाकिस्तानी अधिकारियों की कथित ज्यादतियों पर चिंता जताते हुए जीएचआरडी ने कहा, “परिवारों पर यह दबाव भी डाला जाता है कि वे ऐसे रिश्तेदारों से खुद को अलग करने का लिखित ऐलान करें, जिन पर उग्रवाद में शामिल होने का आरोप है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें आतंकवाद विरोधी कार्रवाई और संपत्ति जब्त किए जाने का सामना करना पड़ता है। किसी काम की जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होनी चाहिए, जिसने वह काम किया है। रिश्तेदारों पर लगे आरोपों के लिए पूरे परिवार को सजा नहीं दी जा सकती।”
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त से अपील की कि वे पाकिस्तान पर दबाव डालें कि वह जबरन लोगों को गायब करने और पूरे परिवार या समूह को सजा देने जैसी कार्रवाइयों को तुरंत बंद करे। साथ ही सभी लापता लोगों के बारे में जानकारी दे, निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करे और शांतिपूर्ण तरीके से मानवाधिकारों की आवाज उठाने के कारण हिरासत में लिए गए बलूच कार्यकर्ताओं को रिहा करे।
पिछले हफ्ते बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने भी पाकिस्तानी अधिकारियों पर बलूचिस्तान में योजनाबद्ध तरीके से सैन्य मौजूदगी बढ़ाने और लोगों को दबाने का अभियान चलाने का आरोप लगाया था। संगठन का कहना था कि इलाके में हिंसा और लोगों का विस्थापन अब आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है।
बीवाईसी ने कहा कि बलूचिस्तान में जो हो रहा है, वह कुछ अलग-अलग घटनाओं की कड़ी नहीं है। यह सैन्य मौजूदगी बढ़ाने, लोगों की रोजी-रोटी खत्म करने, उन्हें विस्थापित करने और आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा की एक योजनाबद्ध नीति है, जिसे जानबूझकर एक साथ लागू किया जा रहा है।
सड़कों के किनारे क्षत-विक्षत शव छोड़ दिए जाते हैं, जो इस हिंसा की बर्बरता और अमानवीयता को दिखाते हैं। हिंसा रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है।
–आईएएनएस
एवाई/पीएम
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