CBSE Digital Evaluation issues 2026 : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने इस वर्ष कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्रणाली ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) लागू की है। इस प्रक्रिया में छात्रों की कॉपियों को स्कैन कर परीक्षकों को कंप्यूटर स्क्रीन पर जांच के लिए उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, इस नई व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर स्टूडेंट्स और पेरेंट्स के बीच असंतोष और बहस देखने को मिल रही है।
Class 12 Result 2026 Controversy : निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल
दरअसल, 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने Physics, Chemistry, Biology और Mathematics जैसे विषयों में अपेक्षा से कम अंक मिलने की शिकायत की है। कुछ छात्रों का दावा है कि उनके नंबर अनुमान से 10 से 20 प्रतिशत तक कम आए हैं। वहीं, ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां JEE Main जैसी परीक्षा क्वालीफाई करने वाले छात्रों को बोर्ड परीक्षा में कम अंक मिले या वे असफल घोषित कर दिए गए। इसके बाद डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे।
छात्रों और पेरेंट्स के बीच यह आशंका भी जताई जा रही है कि स्कैनिंग के दौरान कुछ पन्ने या उत्तर छूट सकते हैं। इसके अलावा तकनीकी गड़बड़ियों और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की कमी को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं।
CBSE Class 12 On-Screen Marking : CBSE का बयान
इस विवाद के बीच CBSE ने छात्रों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि OSM प्रणाली पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और एक समान मूल्यांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। बोर्ड ने 15 मई को जारी अपने आधिकारिक नोटिस में कहा कि यदि कोई छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं है, तो वह पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकता है।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने यह सवाल भी उठाया कि यदि बोर्ड को डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर पूरा भरोसा है, तो छात्रों को उनकी स्कैन की हुई उत्तर पुस्तिकाएं मुफ्त में क्यों नहीं उपलब्ध कराई जातीं। फिलहाल कॉपियां देखने के लिए छात्रों को शुल्क देना पड़ता है, जिसे लेकर खासतौर पर मध्यमवर्गीय परिवारों में नाराजगी देखी जा रही है।
CBSE’s Commitment to Fair, Transparent and Equitable Evaluation
It has been observed that following the declaration of the CBSE Class XII results, several posts have appeared on social media regarding the assessment under the On-Screen Marking (OSM) system, particularly in…
— CBSE HQ (@cbseindia29) May 15, 2026
cbse re evaluation process 2026 : बोर्ड का अलग दावा
CBSE के अनुसार, ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है। इसमें परीक्षकों को चरणबद्ध तरीके से अंक देने होते हैं, ताकि हर उत्तर का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके। बोर्ड का दावा है कि इससे अंक अपलोडिंग और जांच से जुड़ी मानवीय त्रुटियों में कमी आई है।
इस वर्ष CBSE 12वीं परीक्षा का कुल पास प्रतिशत 85.2% रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 88.39% था। यानी इस बार परिणाम में लगभग 3.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
वहीं, कई शिक्षकों ने OSM प्रणाली का समर्थन किया है। उनका कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन से प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनी है। शिक्षकों के मुताबिक शुरुआती प्रशिक्षण के बाद यह प्रणाली उपयोग में आसान साबित हुई और इससे जांच प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हुई है। साथ ही, पेपरलेस व्यवस्था को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
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