देशभर में कोरोना टीकाकरण अभियान को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने स्वदेशी टीके कोवैक्सीन के निर्माण की इजाजत कुछ और सरकारी तथा निजी कंपनियों को भी देने के विकल्प पर विचार कर सकती है। जानकारी के मुताबिक उच्च स्तर पर इस बात पर मंथन किया जा रहा है और टीकाकरण पर वैज्ञानिकों के समूह की राय भी इसके पक्ष में है। केंद्र सरकार को मौजूदा पेटेंट कानूनों के तहत यह अधिकार दिया है कि वह आपात जन स्वास्थ्य की परिस्थितियों के चलते किसी दवा या टीके के निर्माण की अनुमति दूसरी कंपनियों को भी दे सकती है ताकि उसकी उपलब्धता को बढ़ाया जा सके।
18 साल से अधिक आयु के लोगों को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किए जाने के बाद आने वाले दिनों में टीके की मांग में भारी बढ़ोतरी होने का अनुमान है। जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार टीकाकरण अभियान को रफ्तार देने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में केंद्र सरकार के पास स्वदेशी टीके का तत्काल उत्पादन बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प हो सकता है। इसके लिए सरकार कुछ और सरकारी और निजी दवा कंपनियों को अनिवार्य लाइसेंस जारी कर टीका बनाने की अनुमति दे सकती है।
केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट को कोविशिल्ड की 11 करोड़ और भारत बायोटेक को कोवैक्सीन की 5 करोड़ खुराक के लिए आर्डर दे रखा है जिसकी आपूर्ति मई, जून और जुलाई में होनी है। लेकिन यदि यह आपूर्ति समय पर होती भी है तो इससे 3 महीनों तक मौजूदा रफ्तार से भी टीकाकरण जारी रखना संभव नहीं होगा। जबकि सरकार टीकाकरण तेज करना चाहती है। अभी 20-25 लाख टीके रोज लगाने का औसत है। बता दें कि कुछ समय पूर्व केंद्र सरकार ने मिशन कोविड सुरक्षा के तहत 3 और सरकारी कंपनियों में कोवैक्सीन के उत्पादन का ऐलान किया था।
इन तीन कंपनी में उत्तर प्रदेश स्थित बिबकोल, हैदराबाद स्थित आईआईएल तथा मुंबई स्थित हापकिन बायो फार्मास्युटिकल शामिल हैं। तीनों सरकारी कंपनियां हैं जिनमें उत्पादन शुरू होने में अभी समय लगेगा। कोवैक्सीन को आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने मिलकर विकसित किया है।


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