नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र नवरात्र की सातवां दिन यानी सप्तमी तिथि बुधवार को है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। साथ ही आज सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है।
नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है। मां कालरात्रि की आराधना से भक्तों को शक्ति, साहस और सुरक्षा की प्राप्ति होती है। वहीं, धर्म शास्त्रों के अनुसार पूजा, दान और नए कार्य सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत काल या विजय मुहूर्त में करना श्रेयस्कर होता है। हालांकि, राहुकाल और भद्रा के समय किसी भी शुभ काम से बचना चाहिए।
बुधवार का पंचांग देखें तो सूर्योदय 6 बजकर 20 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 35 मिनट पर होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 33 मिनट तक है। सप्तमी पर अभिजित मुहूर्त तो नहीं लेकिन विजय मुहूर्त है, जो 2 बजकर 30 मिनट दोपहर से 3 बजकर 19 मिनट दोपहर तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 57 मिनट तक और अमृत काल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 20 मिनट से 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।
बुधवार को सप्तमी तिथि दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक है। उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन सप्तमी का मान होगा। वहीं, नक्षत्र मृगशिरा शाम 5 बजकर 33 तक रहेगा।
25 मार्च को अशुभ समय पर विचार करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक प्रभावी रहेगा। यमगंड सुबह 7 बजकर 51 मिनट से सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके अलावा, दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगा। साथ ही दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से देर रात 12 बजकर 47 मिनट रात (25 मार्च) तक भद्रा प्रभावी रहेगा। इनमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
–आईएएनएस
एमटी/एएस
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