Dental Education Reform: डेंटिस्ट बनने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। केंद्र सरकार ने नेशनल डेंटल कमीशन एक्ट 2023 लागू कर दिया है, जिसके साथ ही डेंटल शिक्षा और पेशे से जुड़े कई पुराने नियमों में बदलाव किया गया है। अब छात्रों को पढ़ाई के साथ नए सिस्टम के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। यह बदलाव मेडिकल क्षेत्र में लागू सुधारों की तर्ज पर है, जहां डिग्री के साथ अतिरिक्त परीक्षाएं और नई प्रक्रियाएं भी जरूरी हो गई हैं।
प्रैक्टिस से पहले NEXT परीक्षा जरूरी
नए नियमों के तहत बीडीएस (BDS) की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को अब प्रैक्टिस शुरू करने से पहले NExT परीक्षा पास करनी होगी। पहले डिग्री मिलने के बाद सीधे डेंटिस्ट के रूप में काम शुरू किया जा सकता था, लेकिन अब यह संभव नहीं होगा। इस परीक्षा के जरिए छात्रों की क्षमता और कौशल का मूल्यांकन किया जाएगा। विदेशों से डेंटल की पढ़ाई करने वाले छात्रों पर भी यही नियम लागू होगा।
Dental Education Reform: प्राइवेट कॉलेजों की फीस पर नियंत्रण

नए प्रावधानों के तहत निजी डेंटल कॉलेजों की आधी सीटों की फीस पर नियंत्रण रखा जाएगा। इसका सबसे ज्यादा फायदा मध्यम वर्ग के छात्रों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें पहले ऊंची फीस के कारण डेंटल शिक्षा हासिल करने में कठिनाई होती थी। फीस पर नियंत्रण से शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की कोशिश की गई है।
इस नए सिस्टम में राज्यों की भूमिका में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। पहले जहां स्टेट डेंटल काउंसिल में सदस्यों का चयन चुनाव के जरिए होता था, अब उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे प्रशासनिक फैसलों में तेजी आने और सरकार की सीधी भागीदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
विदेशी डेंटिस्ट को भी मिलेगा अवसर
नए नियमों के अनुसार विदेशी नागरिकों को भी भारत में डेंटिस्ट के रूप में काम करने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि उनका रजिस्ट्रेशन अस्थायी रहेगा। इससे भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नई तकनीकों से सीखने का मौका मिल सकता है, साथ ही डेंटल क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सहयोग भी बढ़ेगा।
New Dental Advisory: नई डेंटल एडवाइजरी काउंसिल का गठन
बता दें, सरकार ने इस कानून के तहत एक नई डेंटल एडवाइजरी काउंसिल बनाने का फैसला किया है। इस परिषद में सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह काउंसिल डेंटल शिक्षा और नीतियों से जुड़े सुझाव देगी, जबकि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्य आयोग के पास रहेगा। इससे व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
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