धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से दें इस्तीफा, छात्रों को मिले न्याय : टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद

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नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युवाओं की मांग स्पष्ट है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का हर हाल में इस्तीफा होना चाहिए। उनके इस्तीफे के इतर और किसी भी विषय पर बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इससे पहले भी 1975 में बिहार में आंदोलन हुआ था, जिसके बाद यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया गया था। लेकिन, मैं समझता हूं कि यह आंदोलन अन्य आंदोलन से काफी अलग…

नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युवाओं की मांग स्पष्ट है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का हर हाल में इस्तीफा होना चाहिए। उनके इस्तीफे के इतर और किसी भी विषय पर बात नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इससे पहले भी 1975 में बिहार में आंदोलन हुआ था, जिसके बाद यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया गया था। लेकिन, मैं समझता हूं कि यह आंदोलन अन्य आंदोलन से काफी अलग है। यह आंदोलन शिक्षा को लेकर है।

इसके अलावा, उन्होंने राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, आज की तारीख में हर क्षेत्र में स्थिति बिगड़ी हुई है। अंग्रेजों के शासनकाल में भी इतनी महंगाई नहीं थी, जितनी आज है।

उन्होंने कहा कि मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी युवाओं को पुलिस इस तरह निर्ममता से नहीं पीटती रही होगी। इसका नतीजा यह हुआ कि देशभर में विद्यार्थी आंदोलन कर रहे हैं। अब यह विद्यार्थी देश में बदलाव लाकर रहेंगे।

साथ ही, टीएमसी सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर कहा, मैं उनके इस बयान को छात्रों के नरजरिए से देखता हूं। नीट पेपर मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ आज से दो साल पहले ही कार्रवाई होनी चाहिए थी। अब आगे चलकर सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया रहती है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। एनटीए में भी इन्हीं के लोग शामिल हैं। ये लोग 26 दिनों के बाद सोनम वांगचुक के पास गए। अगर पहले ही दिन चले गए होते, तो आज इस तरह की स्थिति पैदा ही नहीं होती। छात्र देश के भविष्य हैं और यही युवा आगे चलकर बड़े-बड़े अधिकारी बनेंगे। वहीं, जब आप उन्हें पढ़ने का मौका ही नहीं देंगे, तो वो कैसे आगे बढ़ेंगे। जब तक हमारे बच्चे पढ़ेंगे नहीं, तब तक आगे बढ़ने का मौका कैसे मिलेगा।

साथ ही, उन्होंने मेट्रो स्टेशन को बंद किए जाने पर कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि 16 मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया। इस देश में 70 फीसदी से भी ज्यादा लोग 30 साल से कम उम्र के हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को इनकी बात पर ध्यान देना चाहिए। इनकी मांगों पर विचार करना चाहिए। यह सभी बच्चे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस बनेंगे लेकिन जिस तरह की स्थिति अभी बनी हुई है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि यह सरकार डरी हुई है ।

टीएमसी नेता ने कहा कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि केंद्र सरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं मांग रही है? क्या सरकार खुद धर्मेंद्र प्रधान से परेशान नहीं हो रही है? केंद्रीय मंत्रियों के बच्चे विदेश में पढ़ाई करके बेहतर नौकरी प्राप्त करते हैं। हालांकि, अफसोस की बात है कि यह सरकार गरीब बच्चों के लिए कोई काम नहीं कर रही है। इसके विपरीत, गरीब बच्चों के हितों पर लगातार कुठाराघात किया जा रहा है और जो कोचिंग सेंटर इन बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने का काम कर रहे हैं, उन कोचिंग सेंटर को ही निशाना बनाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने कई सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया है। हर विकासशील देश में शिक्षा और स्वास्थ्य मुफ्त होनी चाहिए। आखिर हमारे देश में क्या हो रहा है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के अभाव में मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। सरकार की ओर से 2014 में कई वादे किए गए थे लेकिन ज्यादातर वादों को अब तक पूरा नहीं किया गया।

–आईएएनएस

एसएचके/पीएम

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