जल जीवन मिशन घोटाले में ED सख्त, जयपुर से बिचौलिया संजय बड़ाया गिरफ्तार

Summary :

ED ने राजस्थान में केंद्र की जल जीवन मिशन योजना के कार्यान्वयन से जुड़ी अपनी चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में बिचौलिए संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया है। ED की जयपुर जोनल कार्यालय स्थित इकाई ने पूछताछ के बाद मंगलवार देर रात बड़ाया को गिरफ्तार किया, क्योंकि जांच के दौरान JJM घोटाले में बिचौलिए के रूप में उनकी भूमिका स्थापित हुई थी। यह इस मामले में चौथी गिरफ्तारी है जो हर घर में नल का पानी उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की पहल में कथित 20,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा है। ईडी ने धन शोधन निवारण…

ED ने राजस्थान में केंद्र की जल जीवन मिशन योजना के कार्यान्वयन से जुड़ी अपनी चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में बिचौलिए संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया है। ED की जयपुर जोनल कार्यालय स्थित इकाई ने पूछताछ के बाद मंगलवार देर रात बड़ाया को गिरफ्तार किया, क्योंकि जांच के दौरान JJM घोटाले में बिचौलिए के रूप में उनकी भूमिका स्थापित हुई थी। यह इस मामले में चौथी गिरफ्तारी है जो हर घर में नल का पानी उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की पहल में कथित 20,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपनी जांच करते हुए जयपुर में एक आईएएस अधिकारी के आवास सहित कई जगहों पर छापेमारी की थी।

  • ED ने जल जीवन मिशन घोटाले में बिचौलिए संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया है
  • ED की जयपुर जोनल कार्यालय स्थित इकाई ने देर रात बड़ाया को गिरफ्तार किया
  • जांच के दौरान JJM घोटाले में बिचौलिए के रूप में उनकी भूमिका स्थापित हुई थी

19 जून को तीसरा आरोपी हुआ था गिरफ्तार



इस साल 19 जून को संघीय एजेंसी ने मामले से जुड़े तीसरे आरोपी महेश मित्तल को गिरफ्तार किया। श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के मालिक मित्तल को भी मामले में आगे की जानकारी मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार, बड़ाया और मित्तल अन्य लोगों के साथ मिलकर अवैध संरक्षण प्राप्त करने, टेंडर प्राप्त करने, बिल स्वीकृत करवाने और लोक स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग से प्राप्त विभिन्न टेंडरों के संबंध में उनके द्वारा निष्पादित कार्यों में अनियमितताओं को छिपाने के लिए लोक सेवकों को रिश्वत देने में शामिल थे।

संजय बड़ाया मुख्य आरोपी घोषित



दोनों आरोपियों की भूमिका हरियाणा से चोरी का माल खरीदकर टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट में इस्तेमाल करने में भी सामने आई। ईडी ने भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, जयपुर द्वारा दर्ज एक FIR के आधार पर जांच शुरू की, जिसमें कहा गया था कि मित्तल वरिष्ठ PHED अधिकारियों को रिश्वत देकर इरकॉन द्वारा जारी किए गए कथित फर्जी और मनगढ़ंत कार्य पूर्णता प्रमाण पत्रों के आधार पर JJM कार्यों से संबंधित निविदाएं हासिल करने में भी शामिल थे। ED की जांच में आगे पता चला कि बड़ाया और मित्तल दोनों मुख्य आरोपियों में से हैं और अपराध की आय प्राप्त करने वाले हैं। ईडी के अनुसार, आरोपियों के नाम पर रखे गए विभिन्न बैंक खातों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर संस्थाओं के माध्यम से धन की लूट की गई और अचल और चल संपत्तियों में निवेश करके इसे आगे बढ़ाया गया।

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Desk News