हिमाचल में अब प्लास्टिक कचरे से चमकेंगी सड़कें : सरकार ने जारी की नई SOP, कोलतार की होगी भारी बचत

Summary :

Himachal Pradesh Build Roads with Plastic Waste : हिमाचल की सड़कों को अब और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक के कचरे का इस्तेमाल किया जाएगा और इसके लिए सरकार ने नए नियम (SOP) भी लागू कर दिए हैं। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सड़क बनाने में जो कोलतार (बिटुमिन) लगता है, उसकी खपत कम होगी। इससे पर्यावरण तो साफ रहेगा ही, साथ ही सरकार के बजट की भी मोटी बचत होगी। Social Media पर खूब चर्चा इस नई तरकीब को लेकर सोशल मीडिया…

Himachal Pradesh Build Roads with Plastic Waste : हिमाचल की सड़कों को अब और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक के कचरे का इस्तेमाल किया जाएगा और इसके लिए सरकार ने नए नियम (SOP) भी लागू कर दिए हैं। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सड़क बनाने में जो कोलतार (बिटुमिन) लगता है, उसकी खपत कम होगी। इससे पर्यावरण तो साफ रहेगा ही, साथ ही सरकार के बजट की भी मोटी बचत होगी।

Social Media पर खूब चर्चा

इस नई तरकीब को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है। लोग सरकार के इस कदम को पर्यावरण के लिए बेहतरीन मान रहे हैं। आपको बता दें कि इस पूरी योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (HPPWD) की है। इस विभाग (PWD Himachal) के आधिकारिक सोशल मीडिया पेजों को हजारों लोग फॉलो करते हैं, जहां लोग इस नए फैसले को लेकर अपनी राय दे रहे हैं।

Plastic Waste Roads : नियम भी सख्त

सरकार के नए नियमों के अनुसार प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल को लेकर जो कड़े मानक तय किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं:

  • गंदगी पर रोक: प्लास्टिक के कचरे में धूल, मिट्टी या किसी भी तरह की अशुद्धि की मात्रा एक प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

  • सफाई और छंटाई: नगर निगमों और शहरी निकायों के लिए कबाड़ से मिले प्लास्टिक को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह साफ करना अनिवार्य होगा।

  • कतरन का निश्चित आकार: साफ किए गए प्लास्टिक को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटना (श्रेड करना) होगा, जिनका साइज 2.36 मिलीमीटर से लेकर 600 माइक्रोन के बीच ही होना चाहिए।

  • बड़ा साइज होने पर रिजेक्शन: अगर प्लास्टिक के टुकड़ों का आकार तय मानक से बड़ा पाया जाता है, तो उसे सड़क निर्माण के लिए रिजेक्ट कर दिया जाएगा।

  • संयुक्त निगरानी: इस पूरी प्रक्रिया को सही तरीके से जमीन पर उतारने के लिए लोक निर्माण विभाग, शहरी निकाय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आपसी तालमेल से काम करेंगे।

Environmental Initiative : नए नियमों के तहत

ग्राउंड स्टाफ को काम में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था भी की गई है। नए नियमों के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग हर साल की शुरुआत में ही नगर निकायों को बता देगा कि उन्हें सड़क बनाने के लिए कितने प्लास्टिक की जरूरत है।

इसके बाद विभाग के अधिकारी 15 दिनों के भीतर वहां जाकर कर्मचारियों को सिखाएंगे कि सही प्लास्टिक की पहचान कैसे करनी है, उसे कैसे छांटना है और संभालकर कैसे रखना है।

इस काम के लिए सिर्फ कैरी बैग, प्लास्टिक के बोरे, दूध की थैलियां और शैंपू या डिटर्जेंट की बोतलों वाले लचीले प्लास्टिक का ही इस्तेमाल होगा। गाड़ियों के पार्ट्स वाले कड़क प्लास्टिक और काले रंग की प्लास्टिक थैलियों पर पूरी तरह रोक रहेगी।

काम में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए निगरानी का भी पूरा इंतजाम है। तैयार किए गए प्लास्टिक के स्टॉक की जांच लोक निर्माण विभाग के बड़े अधिकारी और नगर निकाय के अफसर मिलकर करेंगे। इसकी रिपोर्ट सीधे बड़े इंजीनियरों और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को भेजी जाएगी। साथ ही, किस इलाके से कितना प्लास्टिक मिला और उसका कहां इस्तेमाल हुआ, इस पूरे डेटा का एक डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।