शिलांग, 4 जून (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान पूर्वोत्तर भारत में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र की पहचान कभी उग्रवाद, बेरोजगारी और अविकास से होती थी, वह आज बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और निवेश के लिए जाना जा रहा है।
शिलांग में आयोजित उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) के 73वें पूर्ण अधिवेशन के बाद आईएएनएस से बातचीत में खांडू ने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में आधारभूत संरचना के विकास को लगातार प्राथमिकता दी है, जिससे सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों तक पहुंच काफी आसान हुई है।
उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने बुनियादी ढांचा विकास को मजबूत गति दी है। आज हमारे सीमावर्ती क्षेत्र भी तेजी से सुगम होते जा रहे हैं। इससे पूर्वोत्तर के विकास की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि एनईसी की बैठक में मुख्य रूप से विकास संबंधी मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, अंतरराज्यीय सीमा विवादों से जुड़े विषय भी सामने आए और विभिन्न राज्यों ने अपनी चिंताओं को परिषद के समक्ष रखा।
खांडू ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र कभी उग्रवाद, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह विकास, बेहतर संचार नेटवर्क, मजबूत कनेक्टिविटी और बढ़ते निवेश के कारण नई पहचान बना रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा मजबूत नेतृत्व के कारण यह परिवर्तन संभव हुआ है। खांडू ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए देश का प्रवेश द्वार बनने की क्षमता रखता है।
अंतरराज्यीय सीमा विवादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सराहना की। खांडू ने कहा कि सरमा ने पड़ोसी राज्यों के साथ लंबे समय से लंबित सीमा विवादों के समाधान के लिए सक्रिय पहल की है।
उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों की सीमाएं असम से लगती हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पड़ोसी राज्यों के साथ नियमित संवाद के जरिए सीमा विवादों को सुलझाने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। असम और मेघालय के बीच अच्छे परिणाम सामने आए हैं, वहीं असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है।”
खांडू ने उम्मीद जताई कि शेष विवादों का समाधान भी आपसी संवाद और सहयोग के माध्यम से किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय एकीकरण और विकास को और मजबूती मिलेगी।
–आईएएनएस
डीएससी
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