हिमायनी पुरी के खिलाफ पोस्ट पर रोक, दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा समेत कई पक्षों को भेजा नोटिस

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नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी द्वारा दायर मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाते हुए मेटा प्लेटफॉर्म्स सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पक्षकारों को समन जारी किया है। अदालत ने सभी से चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। अदालत ने इस दौरान हिमायनी पुरी के खिलाफ किसी भी तरह की आपत्तिजनक या मानहानिकारक सामग्री को सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर पोस्ट पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रथम दृष्टया मामला बनता…

नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी द्वारा दायर मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाते हुए मेटा प्लेटफॉर्म्स सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पक्षकारों को समन जारी किया है। अदालत ने सभी से चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी।

अदालत ने इस दौरान हिमायनी पुरी के खिलाफ किसी भी तरह की आपत्तिजनक या मानहानिकारक सामग्री को सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर पोस्ट पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और यदि ऐसे कंटेंट को रोका नहीं गया तो हिमायनी को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह निषेधाज्ञा भारत के भीतर लागू होगी, खासकर उन वीडियो और पोस्ट पर जो भारत के आईपी एड्रेस से अपलोड किए गए हैं। वहीं, जो सामग्री भारत के बाहर से अपलोड हुई है, उसे सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा भारत में ब्लॉक किया जाएगा।

हिमायनी पुरी ने अदालत से मांग की है कि इंटरनेट पर अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी खबर पोस्टों और वीडियो को हटाया जाए, जिनमें उनका नाम जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि ये सभी दावे झूठे और बेबुनियाद हैं और इससे उनकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

हिमायनी की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने अदालत में दलील दी कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वे एक केंद्रीय मंत्री की बेटी हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक द्वेष का मामला बताया।

महेश जेठमलानी ने यह भी कहा कि यह पूरी तरह से कल्पना पर आधारित आरोप है कि जिस फर्म में हिमायनी पार्टनर थीं, उसे एप्सटीन से कोई फंड मिला था।

उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि पहले हिमायनी की मां ने विदेशों में संपत्तियों से जुड़े आरोपों को लेकर मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसमें फैसला उनके पक्ष में आया था।

वहीं, मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा कि एक इंटरमीडियरी के रूप में कंपनी खुद से कंटेंट नहीं हटा सकती। ऐसा केवल अदालत या सरकार के निर्देश पर ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘ग्लोबल ब्लॉकिंग ऑर्डर’ संभव नहीं है, क्योंकि इससे कई जटिलताएं पैदा होती हैं।

अरविंद दातार ने यह भी उल्लेख किया कि हिमायनी अमेरिकी नागरिक हैं और चाहें तो अमेरिका में भी मामला दर्ज कर सकती हैं।

अदालत ने निर्देश दिया है कि जिन लोगों ने इस मामले से जुड़े मानहानिकारक पोस्ट किए हैं, वे 24 घंटे के भीतर उन्हें हटा दें। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उन पोस्ट को हटाने के लिए बाध्य होंगे।

हिमायनी पुरी ने अपने बयान में कहा कि सोशल मीडिया और कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके खिलाफ झूठी और निराधार बातें फैलाई जा रही हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है। इसी कारण उन्होंने यह मानहानि का मामला दायर किया है और साथ ही 10 करोड़ रुपए के हर्जाने की भी मांग की है।

–आईएएनएस

वीकेयू/वीसी

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