‘शिवालिक’ के बाद एलपीजी लेकर आ रहा जहाज ‘नंदा देवी’ भी होर्मुज जलडमरूमध्य से निकला

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नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान ईरान की ओर से अनुमति मिलने के बाद एलपीजी लेकर आने वाला दूसरा जहाज ‘नंदा देवी’ भी होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकल गया है। इससे पहले एलपीजी लेकर आने वाला जहाज ‘शिवालिक’ भी होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलता पूर्वक निकला था। सरकारी सूत्रों ने शनिवार को बताया कि ‘शिवालिक’ को भारतीय नौसेना की सुरक्षा में लाया जा रहा है और अगले दो दिनों के भीतर इसके किसी भारतीय बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। संभवतः यह मुंबई या कांडला पहुंचेगा। जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और…

नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान ईरान की ओर से अनुमति मिलने के बाद एलपीजी लेकर आने वाला दूसरा जहाज ‘नंदा देवी’ भी होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकल गया है। इससे पहले एलपीजी लेकर आने वाला जहाज ‘शिवालिक’ भी होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलता पूर्वक निकला था।

सरकारी सूत्रों ने शनिवार को बताया कि ‘शिवालिक’ को भारतीय नौसेना की सुरक्षा में लाया जा रहा है और अगले दो दिनों के भीतर इसके किसी भारतीय बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। संभवतः यह मुंबई या कांडला पहुंचेगा। जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और भारतीय नौसेना के मार्गदर्शन में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि ‘नंदा देवी’ जहाज 46,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी ला रहा है।

सूत्रों के अनुसार, रणनीतिक रूप से संवेदनशील जलक्षेत्र से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए दोनों जहाजों को नौसेना की कड़ी निगरानी में रखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच माल और ऊर्जा के प्रवाह को लेकर हुई उच्च स्तरीय चर्चा के बाद जहाज आ रहे हैं।

इस बीच, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने शुक्रवार को संकेत दिया कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, जिसने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से आवागमन को ठप्प कर दिया है, भारतीय जहाजों को जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग मिल सकता है।

क्षेत्र में भारत और ईरान के साझा हितों की ओर इशारा करते हुए फथली ने कहा, “जी हां, क्योंकि भारत हमारा मित्र है। आप इसे दो-तीन घंटों में देखेंगे। हमारा मानना ​​है कि ईरान और भारत के इस क्षेत्र में साझा हित हैं।”

उन्होंने आगे कहा था कि भारत में राजदूत के रूप में, मैं यह कहना चाहता हूं कि युद्ध के बाद इस स्थिति में भारतीय सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में हमारी मदद की है।

राजदूत का यह बयान ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे होकर विश्व के 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का आवागमन होता है।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या 28 पर है और सभी भारतीय जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से निगरानी की जा रही है।

इनमें से 24 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में स्थित थे, जिनमें 677 भारतीय नाविक सवार थे और 4 जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में स्थित थे, जिनमें 101 भारतीय नाविक सवार थे।

–आईएएनएस

एसडी/डीबीपी

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