एकेडमी के दीक्षांत समारोह के बाद 19 डीएसपी बिहार पुलिस में शामिल हुए

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पटना, 26 मई (आईएएनएस)। बिहार पुलिस एकेडमी का 69वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को राजगीर में आयोजित किया गया। इस दौरान पासिंग-आउट परेड के बाद 19 नवप्रशिक्षित पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) ने औपचारिक रूप से बिहार पुलिस में कार्यभार ग्रहण किया। प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने पुलिसकर्मियों से अपेक्षित लोक सेवा और समर्पण की भावना पर सशक्त संदेश दिया। उन्होंने प्रशिक्षु डीएसपी से कहा कि पुलिसिंग को केवल वेतनभोगी पेशा नहीं समझना चाहिए। हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस एकेडमी में अपने प्रशिक्षण के दिनों को याद करते हुए उन्होंने पंजाब के पूर्व डीजीपी…

पटना, 26 मई (आईएएनएस)। बिहार पुलिस एकेडमी का 69वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को राजगीर में आयोजित किया गया। इस दौरान पासिंग-आउट परेड के बाद 19 नवप्रशिक्षित पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) ने औपचारिक रूप से बिहार पुलिस में कार्यभार ग्रहण किया।

प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने पुलिसकर्मियों से अपेक्षित लोक सेवा और समर्पण की भावना पर सशक्त संदेश दिया।

उन्होंने प्रशिक्षु डीएसपी से कहा कि पुलिसिंग को केवल वेतनभोगी पेशा नहीं समझना चाहिए।

हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस एकेडमी में अपने प्रशिक्षण के दिनों को याद करते हुए उन्होंने पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। विनय कुमार के अनुसार, एक प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी ने एकेडमी के दौरे के दौरान केपीएस गिल से वेतन और भत्तों के बारे में पूछा था।

खबरों के मुताबिक, गिल ने जवाब दिया कि जो कोई भी सिर्फ आर्थिक लाभ के लिए पुलिस सेवा में आता है, वह किसी अच्छी जगह पर पान की दुकान खोलकर इससे ज्यादा कमा सकता है।

1991 बैच के आईपीएस अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस सेवा में प्रवेश किया था, तब उनका मासिक वेतन बहुत कम था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुलिसिंग मूल रूप से समाज के प्रति सेवा, प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी के बारे में है।

डीजीपी ने अधिकारियों से कहा कि आपने इस सेवा में सिर्फ नौकरी पाने या वेतन लेने के लिए प्रवेश नहीं किया है, यह जनसेवा है। डीजीपी ने यह भी बताया कि अधिकारी के कंधों पर अंकित ‘बिहार पुलिस सेवा’ शब्द नागरिकों के प्रति कर्तव्य और जवाबदेही का प्रतीक है।

एक वर्ष का कठोर प्रशिक्षण पूरा करने वाले 19 प्रशिक्षु डीएसपी में से 14 पुरुष और 5 महिलाएं हैं। इस बैच को आधुनिक पुलिसिंग पद्धतियों, साइबर अपराध जांच, डिजिटल साक्ष्य संग्रह, दंगा नियंत्रण, आपदा प्रतिक्रिया, भीड़ प्रबंधन, मानवाधिकार और नेतृत्व विकास में व्यापक प्रशिक्षण दिया गया।

अधिकारियों को राइफल शूटिंग, आधुनिक हथियारों के संचालन, औपचारिक अभ्यास, घुड़सवारी और फील्ड ऑपरेशन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

प्रशिक्षु डीएसपी पूजा कुमारी ने कहा कि एक साल का प्रशिक्षण शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण था, लेकिन बेहद ज्ञानवर्धक भी रहा।

उन्होंने आगे कहा कि शैक्षणिक चरण के बाद मिलने वाली फील्ड पोस्टिंग और भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती हैं।

बैच टॉपर उज्ज्वल कुमार उपकार ने कहा कि इस प्रशिक्षण ने उनके आत्मविश्वास को काफी बढ़ाया है और उन्हें पुलिसिंग के माध्यम से समाज में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार किया है।

समारोह के दौरान पंजाब के पूर्व पुलिस प्रमुख केपीएस गिल को याद किया गया। गिल उग्रवाद के दौर में पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं। वे 1995 में सेवानिवृत्त हुए और 2017 में 82 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

–आईएएनएस

एमएस/

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