महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात, 19 जिलों के 83 तालुकों में 20 दिनों से ज्यादा समय से बारिश नहीं हुई

Summary :

मुंबई, 16 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के 19 जिलों के 83 तालुकों में 20 दिनों से ज्यादा समय से बारिश नहीं हुई है। जिसकी वजह से खरीफ की फसलें गंभीर संकट का सामना कर रही हैं, जिससे कई जिले सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कई मंत्रियों ने हालात पर गहरी चिंता जताई। हालांकि, तुरंत किसी राहत पैकेज का ऐलान नहीं किया गया, लेकिन सीएम फडणवीस ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया। कैबिनेट में चर्चा के बाद सरकार ने साफ किया कि…

मुंबई, 16 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के 19 जिलों के 83 तालुकों में 20 दिनों से ज्यादा समय से बारिश नहीं हुई है। जिसकी वजह से खरीफ की फसलें गंभीर संकट का सामना कर रही हैं, जिससे कई जिले सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं।

मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कई मंत्रियों ने हालात पर गहरी चिंता जताई। हालांकि, तुरंत किसी राहत पैकेज का ऐलान नहीं किया गया, लेकिन सीएम फडणवीस ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया।

कैबिनेट में चर्चा के बाद सरकार ने साफ किया कि सूखे की औपचारिक घोषणा तुरंत नहीं की जा सकती। नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एनडीआरएफ) के दिशानिर्देशों और सूखे के प्रबंधन के केंद्रीय नियमों के तहत, आर्थिक मदद पाने के लिए 5 अक्टूबर के बाद ही फसलों के नुकसान का आधिकारिक सर्वे (पंचनामा) और जमीनी स्तर पर जांच की जानी चाहिए। समय से पहले सर्वे करने से किसानों को केंद्रीय सहायता पैकेज से वंचित होने का खतरा हो सकता है। उस तारीख से पहले आकलन करने से प्रभावित किसान आधिकारिक राहत सहायता के लिए अयोग्य हो सकते हैं और नुकसान का गलत अनुमान लग सकता है। सरकार अभी किसानों के लिए राहत उपायों की एक विस्तृत सूची तैयार कर रही है और अधिकारियों से बेहतर तालमेल बिठाने को कहा गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कृषि विभाग ने अपनी प्रस्तुति में यह बात कही।

कैबिनेट ने क्षेत्रीय रिपोर्टों की समीक्षा की, जिनसे पता चला कि 18-19 जिलों में लंबे समय तक सूखा रहा है, जिसमें मराठवाड़ा, विदर्भ और पश्चिमी महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और सीएम ने सभी जिला कलेक्टरों और फील्ड प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने और शुरुआती राहत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। प्रभावित जिलों में स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया गया है कि वे शहरी और ग्रामीण इलाकों में पानी के संभावित संकट को रोकने के लिए मौजूदा बांधों के पानी के भंडार को प्राथमिकता दें और उसे सख्ती से सिर्फ पीने के पानी के लिए सुरक्षित रखें।

5 अक्टूबर को आधिकारिक सर्वे शुरू होने का इंतजार करते हुए, सरकार आपातकालीन राहत सूचियां तैयार कर रही है, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता का आकलन कर रही है और कृषि विभागों को निर्देश दे रही है कि वे बची हुई खरीफ फसलों की सुरक्षात्मक सिंचाई के लिए किसानों का मार्गदर्शन करें।

राज्य कृषि विभाग द्वारा क्षेत्र-वार फसल की स्थिति पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, बीड में बोए गए क्षेत्र का 37.21 प्रतिशत हिस्सा खराब हो गया है; जालना में 27.83 प्रतिशत और छत्रपति संभाजीनगर में 7.06 प्रतिशत हिस्सा खराब हुआ है।

लातूर, धाराशिव और परभणी में हल्की मिट्टी वाली जमीन पर सोयाबीन, मूंग, उड़द और कपास की फसलें सूख रही हैं।

सोयाबीन की फसलों में ‘येलो मोजेक वायरस’ का बड़े पैमाने पर प्रकोप भी देखा गया है। पश्चिमी महाराष्ट्र के सोलापुर, सतारा, सांगली और अहिल्यानगर जैसे बारिश पर निर्भर इलाकों में लंबे समय तक बारिश न होने से मूंग, उड़द, सोयाबीन, मक्का और बाजरा की फसलों पर बुरा असर पड़ा है। इन इलाकों में पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत की कमी आने की आशंका है।

विदर्भ इलाके में सोयाबीन और कपास की फसलों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अमरावती, अकोला, बुलढाणा और वाशिम के कई तालुकाओं में 2 से 3 हफ़्ते तक बारिश नहीं हुई है।

हल्की मिट्टी वाली जमीन पर सोयाबीन की फसलें सूख गई हैं, जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे फसलों को बचाने के लिए सुरक्षात्मक सिंचाई कर रहे हैं। कम बारिश के कारण नागपुर, चंद्रपुर और गढ़चिरौली के कुछ हिस्सों में धान की रोपाई में देरी हुई है। उत्तरी महाराष्ट्र के नंदुरबार और नासिक के कुछ तालुकाओं में बारिश की कमी से मक्का, कपास और दूसरी फसलों की बढ़त रुक गई है।

हालांकि, धुले और जलगांव के कुछ हिस्सों में हाल ही में हुई बारिश से खरीफ की फसलों को थोड़ी राहत मिली है। नंदुरबार में सामान्य बारिश का सिर्फ 46.6 प्रतिशत ही बारिश हुई है।

सोलापुर, कोल्हापुर, बीड, लातूर, धाराशिव, परभणी, हिंगोली, अकोला, वाशिम, अमरावती, वर्धा, नागपुर और चंद्रपुर में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है।

इस बीच, विपक्ष के नेताओं, जिनमें कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार और सोलापुर की सांसद प्रणति शिंदे, और शिवसेना (यूबीटी) के नेता शामिल हैं, उन्होंने प्रभावित जिलों में तुरंत सूखा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि 19 जिलों और 83 से ज्यादा तहसीलों में बारिश की भारी कमी है और चारे व पानी की किल्लत का खतरा मंडरा रहा है।

विपक्ष ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह मॉनसून के बाद की औपचारिक समय-सीमा का इंतजार किए बिना तुरंत आपातकालीन राहत पैकेज जारी करे, फसल ऋण माफ करे और चारे के कैंप व टैंकर से पानी की सप्लाई की व्यवस्था करे।

–आईएएनएस

डीकेएम/एएस

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.