वाराणसी, 2 नवंबर (आईएएनएस)। अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने सोमवार को कहा कि अदाणी समूह भारत की प्रमुख चुनौतियों के समाधान के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लागू कर रहा है, जो वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
वाराणसी में आयोजित “आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान” विश्व संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश के सामने आज भी गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और अंतिम छोर तक बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने जैसी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान में उद्योग जगत की महत्वपूर्ण भूमिका है।
डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा, “भारत जैसा विशाल देश अभी भी गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। अदाणी समूह में हमने इन चुनौतियों का समाधान करने और 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य में योगदान देने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाएं लागू की हैं।”
प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यवसायों को अपने संचालन के केंद्र में स्थिरता को रखना चाहिए और स्वार्थ से पहले कर्तव्य को महत्व देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “योग भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता का उत्कृष्ट उदाहरण है। दुनिया ने योग के महत्व को स्वीकार किया है, जो मन और शरीर के संतुलन का संदेश देता है। इसी तरह मोटा अनाज (मिलेट) कभी हमारी पारंपरिक खाद्य संस्कृति का हिस्सा था और आज यह पोषण, जलवायु अनुकूलता और खाद्य सुरक्षा पर वैश्विक चर्चाओं का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।”
सतत विकास के प्रति अदाणी समूह की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए डॉ. अदाणी ने कहा कि समूह ने ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।
उन्होंने गुजरात के खावड़ा में विकसित किए जा रहे नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क बनने की दिशा में अग्रसर है। इस परियोजना की प्रस्तावित क्षमता सौर और पवन ऊर्जा के माध्यम से 30 गीगावाट बिजली उत्पादन की है।
उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि स्थिरता केवल वार्षिक रिपोर्ट का एक अध्याय बनकर नहीं रह जानी चाहिए। इसे व्यवहार और कार्यान्वयन का हिस्सा बनाना होगा।”
डॉ. प्रीति अदाणी ने जोर देते हुए कहा कि भारत के विकास, सामाजिक उत्थान और पर्यावरणीय संतुलन के लिए उद्योगों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि आर्थिक प्रगति के साथ-साथ समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी स्थायी लाभ सुनिश्चित किए जा सकें।
–आईएएनएस
डीबीपी
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