अमरावती, 26 जून (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को कहा कि आंध्र प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति लागू है। चंद्रबाबू अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मादक पदार्थों की तस्करी पर नकेल कसने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी विरोधी दिवस पर, हमें याद दिलाया जाता है कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अंततः हमारे युवाओं, उनके सपनों, उनके स्वास्थ्य और उनके भविष्य के लिए लड़ाई है।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में हम मादक पदार्थों की तस्करी पर नकेल कसने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, हम नशे की लत से जूझ रहे लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करेंगे, ताकि वे सम्मान के साथ उबर सकें और अपना जीवन फिर से संवार सकें।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू ने आगे कहा कि हमारे राज्य में नशीली दवाओं को पनपने देने के दिन अब बीत चुके हैं। आज आंध्र प्रदेश नशीली दवाओं की तस्करी के प्रति जीरो टोलरेंस, पुनर्वास चाहने वालों के लिए आशा और हर परिवार के लिए एक सुरक्षित भविष्य का प्रतीक है।
मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति और अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार नशे की समस्या को पूरी तरह से खत्म करने के अपने दृढ़ संकल्प को दोहराती है।
लोकेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार आक्रामक कानून प्रवर्तन अभियानों, कड़ी सीमा और पारगमन निगरानी तथा व्यापक सामुदायिक पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से नशीली दवाओं के नेटवर्क को सक्रिय रूप से नष्ट कर रही है और साथ ही कमजोर समुदायों के लिए व्यवहार्य, कानूनी आजीविका के अवसर सृजित कर रही है। राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक, शिक्षण संस्थान और नागरिक समाज समूह से इस महत्वपूर्ण मिशन में सहयोग करने का आह्वान करती है ताकि एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा शुरू की गई प्रमुख पहलों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इनमें चैतन्यम अभियान शामिल है, जिसके तहत राज्य ने अल्लूरी सीताराम राजू जिले में गांजा की खेती को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। 29,840 एकड़ भूमि पर वैकल्पिक फसलें लगाई गई हैं। सरकार ने गांजा की खेती में शामिल 325 परिवारों का पुनर्वास किया है।
–आईएएनएस
एमएस/
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