श्रीनगर, 12 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 21 सितंबर से शीतकालीन विधानसभा सत्र बुलाया है।
एलजी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर विधानसभा का सत्र बुलाया।
विधानसभा, जम्मू-कश्मीर सरकार का विधायी अंग है। वर्तमान में इसमें 95 सदस्य हैं, जो 95 निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुने जाते हैं। विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, जब तक कि इसे पहले भंग न कर दिया जाए।
अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने से पहले, राज्य में द्विसदनीय विधायिका थी, जिसमें उच्च सदन को विधान परिषद और निचले सदन को विधानसभा कहा जाता था।
संसद द्वारा 5 अगस्त, 2019 को पारित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम ने इसे एक सदनीय विधायिका से बदल दिया और साथ ही राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में पुनर्गठित किया। वर्तमान 13वीं विधानसभा का चुनाव सितंबर और अक्टूबर 2024 में हुआ था।
मौजूदा विधानसभा में, सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41, भारतीय जनता पार्टी के पास 29, कांग्रेस के पास 6, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 4, सीपीआई (एम) के पास 1, अवामी इत्तेहाद पार्टी के पास 1, आम आदमी पार्टी के पास 1, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के पास 1 और निर्दलीय सदस्यों की संख्या 6 है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल रहीम राथर विधानसभा के अध्यक्ष हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सदन के नेता हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के सुनील शर्मा जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार को कांग्रेस, सीपीआई (एम) और चार निर्दलीय सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।
इस सत्र में विधानसभा के भीतर कई अहम मुद्दों को उठाने की बात कही जा रही है।
माना जा रहा है कि एक बार फिर विधानसभा में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग उठाई जाएगी।
–आईएएनएस
डीकेएम/डीकेपी
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