बारामती/मुंबई, 4 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के बारामती विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की उम्मीदवार और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार ने भारी बहुमत से जीत हासिल की। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में सुनेत्रा पवार ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिसमें 2019 में उनके पति अजित पवार द्वारा बनाया गया जीत का अंतर भी शामिल है।
सोमवार को मतगणना के 24वें चरण के अंत में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने 218,930 वोटों के रिकॉर्ड तोड़ अंतर से जीत हासिल की है। इस जीत को अब भारत के इतिहास में किसी भी विधायक उम्मीदवार की सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।
चुनाव में सुनेत्रा पवार के पीछे सत्ता का पूर्ण एकीकरण देखने को मिला। उनके बेटों जय पवार और पार्थ पवार की अपीलों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के समर्थन से वोटों की एक विशाल लहर उत्पन्न हुई।
एक भी प्रतिद्वंद्वी 1,000 वोटों का आंकड़ा पार नहीं कर सका। सुनेत्रा पवार सहित कुल 23 उम्मीदवार थे।
करुणा मुंडे को 125 वोट मिले, जबकि अभिजीत बिचुकले को 121 वोट मिले। इस परिणाम के साथ सुनेत्रा पवार ने आधिकारिक तौर पर साहिबाबाद (उत्तर प्रदेश) के सुनील कुमार शर्मा द्वारा बनाए गए पिछले राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 2022 में 2,14,835 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी।
चुनाव जीतने की घोषणा के बाद मीडिया से बात करते हुए एनसीपी सांसद पार्थ पवार ने कहा, “रिकॉर्ड अंतर से हमें चुनने के लिए मैं जनता का आभारी हूं। हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि हमें ऐसे हालात में चुनाव लड़ना पड़ेगा।”
पार्थ पवार ने कहा कि वे जनता के प्रति समर्पित रहेंगे और आचार संहिता समाप्त होने के बाद जन शिकायत निवारण सभाएं आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।
मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए सुनेत्रा पवार ने कहा कि यह जीत अजित पवार को श्रद्धांजलि है और उन्होंने अपनी इस ऐतिहासिक जीत को अपने दिवंगत पति की स्मृति को समर्पित किया है।
उन्होंने समर्थकों से संयम बनाए रखने और शोर-शराबा करने या गुलाल फेंकने से बचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “बारामती की जनता ने अपने वोटों के माध्यम से जो विश्वास दिखाया है, वह आदरणीय अजित दादा की पवित्र स्मृति को समर्पित है। आज हम सभी भावुक हैं। मैं सभी कार्यकर्ताओं से अनुरोध करती हूं कि वे जुलूस न निकालें और अत्यधिक जश्न न मनाएं। आइए हम संयम बरतें, जो दादा के विचारों का सम्मान करे।”
उन्होंने कहा, “मैं बारामती के सभी लोगों को तहे दिल से धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने मुझे दादा के सपनों की बारामती को आकार देने का अवसर दिया। यह अंत नहीं बस शुरुआत है। दृढ़ संकल्प, संघर्ष और एक नई बारामती की शुरुआत।”
–आईएएनएस
ओपी/वीसी
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