कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की अंतरिम सुरक्षा 17 जुलाई तक बढ़ाई

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कोलकाता, 3 जुलाई (आईएएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के विधायकों के हस्ताक्षरों में विसंगति के मामले में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी सहित पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। हालांकि, पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियों के लिए विपक्ष के लिए आरक्षित सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में विसंगति का मामला सामने आया था। इस मामले को लेकर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने मामले में 17 जुलाई तक सुरक्षा बढ़ाई। न्यायमूर्ति सुव्रा घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ ने अभिषेक बनर्जी को सीआईडी ​​की चल रही…

कोलकाता, 3 जुलाई (आईएएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के विधायकों के हस्ताक्षरों में विसंगति के मामले में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी सहित पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।

हालांकि, पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियों के लिए विपक्ष के लिए आरक्षित सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में विसंगति का मामला सामने आया था। इस मामले को लेकर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने मामले में 17 जुलाई तक सुरक्षा बढ़ाई। न्यायमूर्ति सुव्रा घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ ने अभिषेक बनर्जी को सीआईडी ​​की चल रही जांच में पूर्ण सहयोग जारी रखने का निर्देश दिया।

विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को सौंपे गए एक प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों की शिकायतें सामने आने के बाद, सीआईडी ​​ने इस वर्ष मई में जांच शुरू की।

इस प्रस्ताव में सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नयना बंदोपाध्याय को विपक्ष का उपनेता और फिरहाद हकीम को विधानसभा में तृणमूल विधायक दल का मुख्य सचेतक नियुक्त करने का प्रस्ताव था।

कथित विसंगतियों को सबसे पहले तृणमूल कांग्रेस के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने उठाया, जिसके बाद सीआईडी ​​ने औपचारिक जांच शुरू की। आरोपों के सामने आने के तुरंत बाद, तृणमूल कांग्रेस ने बनर्जी और साहा को निलंबित कर दिया।

इस घटनाक्रम के चलते विपक्ष के आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त नेता के नेतृत्व में 60 विधायकों ने विद्रोह कर दिया। उन्होंने तृणमूल विधायक दल के भीतर बहुमत का दावा करते हुए एक नया प्रस्ताव पेश किया।

इसके बाद अध्यक्ष ने नए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता दी गई।

गुरुवार को पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की विधायक दल के ‘विरोधी लेकिन बहुमत वाले’ गुट ने भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की पूर्ण पीठ से मुलाकात की और पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपने अधिकार का दावा किया।

इस मामले में अभिषेक बनर्जी से दक्षिण कोलकाता के भवानी भवन स्थित मुख्यालय में सीआईडी ​​अधिकारियों ने दो बार पूछताछ की थी। अभिषेक ने यह भी घोषणा की थी कि वे जांच प्रक्रिया में अपना सहयोग जारी रखेंगे।

–आईएएनएस

एमएस/

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