भवानीपुर, 24 मार्च (आईएएनएस)। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, भवानीपुर सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले निर्वाचन क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है। यहां मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के बीच कड़ी टक्कर होने वाली है, जिससे यह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है जो काफी हद तक जनभावना पर निर्भर करती है।
भाजपा ‘परिवर्तन यात्रा’ के माध्यम से अपना प्रचार जारी रखे हुए है, वहीं भवानीपुर के कई निवासी बनर्जी के शासन से काफी हद तक संतुष्ट नजर आ रहे हैं। कई स्थानीय लोगों ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है, जबकि कुछ तो अपनी राजनीतिक पसंद के बारे में खुलकर बात करने से भी कतरा रहे हैं।
आईएएनएस से बात करते हुए एक निवासी ने कहा कि ममता बनर्जी ने भवानीपुर के लिए बहुत कुछ किया है। हम चाहते हैं कि ‘दीदी’ फिर से सत्ता में आएं। उन्होंने हम सबके लिए बहुत काम किया है, और हम कोई बदलाव नहीं चाहते। यहां सब कुछ ठीक है।
एक अन्य निवासी ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि ममता बनर्जी यहां जीतेंगी। वह सबके लिए बहुत अच्छा काम कर रही हैं, और इसीलिए हम मानते हैं कि उन्हें सत्ता में बने रहना चाहिए। भाजपा गलत सूचना फैला रही है, लेकिन हम अपना वोट बर्बाद नहीं करेंगे। अगर दीदी अच्छा काम कर रही हैं, तो हमें बदलाव की क्या जरूरत है?
एक तीसरे निवासी ने सीधे-सीधे कहा कि हम बदलाव नहीं चाहते। दीदी यहां जीतेंगी।
राज्य की राजनीति की अनिश्चितता को स्वीकार करते हुए भी कुछ लोग बनर्जी की जीत की ओर झुकाव रखते थे। एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा कि पूरे पश्चिम बंगाल में कौन जीतेगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन मुझे विश्वास है कि दीदी फिर से जीतेंगी।
एक बुजुर्ग निवासी ने कहा कि दीदी निश्चित रूप से जीतेंगी। उन्होंने राज्य में महत्वपूर्ण काम किया है। मैं 80 साल का हूं, और मैंने पहले कभी ऐसा विकास नहीं देखा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, जो 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होने वाले हैं, सत्तारूढ़ तृणमूल और भाजपा के बीच एक ध्रुवीकृत मुकाबले के रूप में उभर रहे हैं, जिसमें वामपंथी और कांग्रेस की भूमिका नगण्य है। तृणमूल ने सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला करने के लिए अपने उम्मीदवारों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं और 74 मौजूदा विधायकों को बदल दिया है।
2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने 48.02 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 215 सीटें हासिल कीं, जबकि भाजपा ने 38 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 77 सीटें जीतीं, जो 2016 के मुकाबले एक बड़ी छलांग थी।
–आईएएनएस
एमएस/
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