महिला आरक्षण पर बार-बार बदल रहा भाजपा का रुख : लोकसभा में बोलीं अकाली दल की सांसद

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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल की नेता और बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि भाजपा बार-बार महिला आरक्षण के नियमों में बदलाव कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर छिपाकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एसएडी ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन असंवैधानिक परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, ”संविधान स्पष्ट है कि परिसीमन केवल जनगणना के बाद ही किया जा सकता है। परिसीमन इस तरह किया जाना चाहिए कि सभी…

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल की नेता और बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि भाजपा बार-बार महिला आरक्षण के नियमों में बदलाव कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर छिपाकर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एसएडी ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन असंवैधानिक परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा, ”संविधान स्पष्ट है कि परिसीमन केवल जनगणना के बाद ही किया जा सकता है। परिसीमन इस तरह किया जाना चाहिए कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अनुपातिक वृद्धि हो।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्व को लेकर दिए गए मौखिक आश्वासन पर हरसिमरत बादल ने कहा, ”सरकार को लिखित आश्वासन देना चाहिए। हम सभी जानते हैं कि 1986 में पंजाब को चंडीगढ़ सौंपने, ‘बंदी सिंह’ को रिहा करने और हाल में पंजाब वेयरहाउसिंग अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या की सीबीआई जांच के मौखिक आश्वासनों का क्या हश्र हुआ?”

हरसिमरत बादल ने बताया कि केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में सत्र बुलाया था, लेकिन 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू नहीं किया। यह कार्य जनगणना और परिसीमन के बाद भी किया जा सकता था। अब बिना जनगणना के संशोधित विधेयक लाया गया।

उन्होंने कहा कि देश देख रहा है कि कैसे बहुमत के बल पर इस विधेयक को संसद में आगे बढ़ाया गया। पिछले तीन वर्षों में सरकार जनगणना करा सकती थी, लेकिन नहीं कराई। उन्होंने सरकार से कहा कि विधेयक में अपने उद्देश्य स्पष्ट रूप से बताएं, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि लोकसभा सीटें किस आधार पर बढ़ाई जा रही हैं।

सांसद ने कहा कि महिलाओं को केवल चुनाव से पहले याद किया जाता है और ‘नारी शक्ति’ के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने के लिए एक पारदर्शी कानून बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2014 और 2019 के भाजपा चुनाव घोषणापत्र का हिस्सा था, लेकिन 2024 के चुनाव से ठीक पहले तक इसे लागू नहीं किया गया, जिसका उद्देश्य केवल महिला मतदाताओं को आकर्षित करना था।

मीडिया से बातचीत में हरसिमरत बादल ने कहा कि पंजाब के किसान केंद्र और राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार की गलत नीतियों के कारण परेशान हैं। केंद्र ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आप सरकार ने सभी फसलों पर एमएसपी देने का वादा किया था, लेकिन वह पिछले 15 दिनों से मंडियों में आ रही गेहूं की खरीद भी ठीक से नहीं कर पा रही है।

सांसद ने कहा कि आप सरकार ने पिछले साल बाढ़ से फसल को हुए भारी नुकसान और तीन हफ्ते पहले बारिश व ओलावृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा देने का भी वादा किया था, लेकिन दोनों ही मामलों में वह असफल रही है।

–आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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