Breaking: संसद में गिरा महिला आरक्षण बिल! सरकार नहीं जुटा पाई दो-तिहाई बहुमत

Parliament Special Session 2026

Parliament Special Session 2026: लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम पास नहीं हो पाया है। बता दें, कि महिला आरक्षण अधिनियम से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 को लेकर सदन में विस्तृत चर्चा हुई। हालांकि, सबसे अहम 131वें संविधान संशोधन विधेयक को सदन में दो- तिहाई बहुमत नहीं मिल सका, जिसके कारण यह पारित नहीं हो पाया।

Parliament Special Session 2026: वोटिंग में नहीं मिला दो-तिहाई समर्थन

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जानकारी दी कि विधेयक पर मतदान कराया गया, जिसमें कुल 489 सांसदों ने हिस्सा लिया। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन विधेयक था, इसलिए इसे पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था। 489 सांसदों के हिसाब से कम से कम 326 वोटों की जरूरत थी, लेकिन बिल को इतने वोट नहीं मिल सके। इसी वजह से यह विधेयक 28 वोटों से गिर गया।

बाकी विधेयकों पर चर्चा टली

मतदान के बाद संसदीय कार्य राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने घोषणा की कि बाकी दो विधेयकों पर आगे चर्चा नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महिलाओं को अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस विधेयक पर सदन में लगभग 21 घंटे तक बहस चली। इस दौरान कुल 130 सांसदों ने अपने विचार रखे, जिनमें 56 महिला सांसद भी शामिल थीं। बहस के दौरान पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे, लेकिन अंत में सहमति नहीं बन सकी।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर विपक्ष समर्थन नहीं करेगा, तो बिल पास होना मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि कौन उनके अधिकारों के रास्ते में बाधा बन रहा है। वहीं, विपक्ष ने विधेयक के क्रियान्वयन और परिसीमन से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं।

सरकार के लिए बड़ा झटका

पिछले 11 वर्षों में यह पहला मौका माना जा रहा है जब केंद्र सरकार लोकसभा में कोई अहम विधेयक पारित नहीं करवा सकी। महिला आरक्षण से जुड़ा यह बिल सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण था, लेकिन पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल पाई। हालांकि यह विधेयक फिलहाल पास नहीं हो सका है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए वह आगे भी प्रयास करती रहेगी। आने वाले समय में इस विषय पर फिर से चर्चा और नया प्रस्ताव लाए जाने की संभावना बनी हुई है।

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