MP BJP MLA Viral Video: मध्य प्रदेश के भिंड जिले की मौ तहसील के रसनौल गांव में स्थित श्रीराम-जानकी एवं हनुमान मंदिर, जिसे लोग ‘मस्तराम बाबा स्थान’ के नाम से जानते हैं, इन दिनों फिर चर्चा में है। यहां के संत सीताराम महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनका व्यवहार एक जनप्रतिनिधि के साथ असामान्य नजर आ रहा है। दरअसल हाल ही में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान सामने आए वीडियो में देखा गया कि भागवत कथा के मंच पर पहुंचे बीजेपी विधायक प्रदीप अग्रवाल के साथ सीताराम महाराज ने अप्रत्याशित व्यवहार किया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही विधायक उन्हें सम्मान देने पहुंचे, संत ने उन्हें धक्का दे दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने विधायक द्वारा पहनाई गई माला भी उतारकर फेंक दी और कुछ थप्पड़-मुक्के भी मारते हुए दिखाई दिए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिसके बाद यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
MP BJP MLA Viral Video: मस्तराम बाबा से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
दतिया में विधायक जी को संत ने पीटा या आशीर्वाद दिया?
बेरछा ग्राम में चल रही भगवत कथा में भिंड से आए संत सीताराम का आशीर्वाद लेने पहुँचे थे सेवड़ा से भाजपा विधायक प्रदीप अग्रवाल।तभी बाबा ने मारे मुक्के, विधायक द्वारा पहनाई गई माला भी फेंकी।
VC: socialmedia pic.twitter.com/Pw79a4t0hn— omprakash pawar (ओपी पवार) (@Oppawar1) April 16, 2026
रसनौल गांव का यह मंदिर पूर्व संत मस्तराम बाबा से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि मस्तराम बाबा का स्वभाव भी काफी अलग था और वे अपने अनोखे आचरण के लिए जाने जाते थे। उनके शिष्य सीताराम महाराज पिछले कई वर्षों से मंदिर की देखरेख कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीताराम महाराज का व्यवहार भी कभी बहुत शांत और भक्ति में डूबा हुआ होता है, तो कभी अचानक उनका गुस्सैल रूप सामने आ जाता है।
घटना के दौरान क्या हुआ?
बेरछा गांव में आयोजित भागवत कथा के दौरान जब विधायक प्रदीप अग्रवाल मंच पर पहुंचे, तो वे संत का सम्मान करना चाहते थे। लेकिन तभी सीताराम महाराज ने उन्हें धक्का दे दिया और गले में डाली गई माला को तुरंत उतारकर फेंक दिया। वीडियो में यह पूरा घटनाक्रम साफ दिखाई दे रहा है, जिससे लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विधायक की प्रतिक्रिया
इस घटना पर खुद विधायक प्रदीप अग्रवाल ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे नकारात्मक रूप में न लेते हुए ‘प्रभु का आशीर्वाद’ बताया। उनके इस बयान के बाद मामला और भी चर्चा में आ गया है, क्योंकि आमतौर पर ऐसी घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।
लोगों की मिली-जुली राय
इस पूरे मामले पर लोगों के बीच अलग-अलग मत हैं। कुछ लोग इसे संत की परंपरा या आध्यात्मिक व्यवहार का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे सार्वजनिक मंच पर अनुचित और अस्वीकार्य बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर बहस जारी है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि सीताराम महाराज अपने पास हथियार रखते हैं और कई बार सार्वजनिक रूप से उन्हें दिखाते भी हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या पुलिस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि आस्था और परंपरा के नाम पर सार्वजनिक व्यवहार की सीमाएं क्या होनी चाहिए। जहां एक ओर लोग इसे श्रद्धा से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे सामाजिक मर्यादा के खिलाफ मान रहे हैं।
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