Inter Caste Marriage in Telangana : तेलंगाना ने जातिगत सर्वे जारी कर दिए हैं, ऐसे में कई ऐसे खुलासे भी सामने आए हैं जो सामाजिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. दरअसल यह सर्वे राज्य की सामाजिक स्थिति समझने के मकसद से कराए गए.
सर्वे के अनुसार एक दिलचस्प आंकड़ा राज्य में हुए इंटरकास्ट मैरिज यानी अंतरजातीय विवाहों को लेकर सामने आए हैं जिसमें पता चला है कि राज्य की कौन सी जातियां अंतरजातीय विवाद करने में आगे रही हैं.
अय्यर, राजू, ईसाई आगे
सर्वे में कहा गया है कि अंतरजातीय विवाह करने वाली जातियों में सबसे आगे अय्यर, राजू, ईसाई शामिल हैं. इसके बाद कापू और ब्राह्मण समाज भी अंतरजातीय विवाह करने में आगे है. वहीं खेती से जुड़ी जातियां जैसे रेड्डी और वेलामा जातियां भी अंतरजातीय विवाह करने में आगे हैं.
बता दें, अंतरजातीय विवाह को सामाजिक भेदभावों को ख़त्म करने के लिए अहम् टूल माना गया है. ऐसे में राज्य में अंतरजातीय विवाह सोशल मोबिलिटी और इक्वलिटी की दिशा में सकारात्मक कदम के रूप में देखा जाता है. बता दें अय्यर समाज में 12 फीसदी परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अंतरजातीय विवाह किया है. यह अपने आप में अच्छी खासी आनुपातिक संख्या है.
OBC आबादी सबसे अधिक
बता दें तेलंगाना में हाल फिलहाल में जातीय सर्वे जारी किए गए थे. आंकड़ों में सबसे बड़ी आबादी के रूप में OBC आबादी है. राज्य की कुल आबादी के 56.33 प्रतिशत लोग पिछड़े वर्ग से हैं, इनमें BC मुसलमान भी शामिल हैं।
वहीं अनुसूचित जाति (SC) की आबादी 17.43% है, अनुसूचित जनजाति (ST) 10.45% है और मुसलमानों की संख्या 12.56% है। इस सर्वेक्षण में पूरे राज्य के करीब साधे 3 करोड़ लोगों का सर्वे लिया गया है.
समुदाय की संख्या
बता दें इस सर्वे में 35 प्रमुख जातियों की जानकारी दी गई है. आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की सबसे बड़ी आबादी वाला समुदाय ‘मदिगा’ के रूप में सामने आया है. इनकी संख्या 36.58 लाख है, जो राज्य की कुल आबादी का लगभग 10.3% फीसदी है.
वहीं, दूसरे नंबर राज्य में शेख मुस्लिम समुदाय है. यह दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है. इनकी संख्या 27.96 लाख है, जो कुल आबादी का 7.9 प्रतिशत है. मुदिराज समुदाय तीसरे नंबर पर आता है. इनकी संख्या 26.39 लाख है, जो कुल आबादी का 7.4 फीसदी है.
BC समूह हुए मजबूत
मादिगा के बाद मुदिराज (7.4%) और लाम्बाडी/बंजारा (6.8%) आते हैं। इस रिपोर्ट में अंतर-जातीय विवाहों में बढ़ोतरी भी देखी गई है। सर्वे से पता चला है कि कुछ BC समूहों ने आर्थिक रूप से पारंपरिक रूप से संपन्न जातियों के बराबर पहुंच बना ली है, जबकि कुछ अब भी कई अहम संकेतकों पर पीछे हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि यह डेटा भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं और आरक्षण तैयार करने में मदद करेगा, ताकि जहां सबसे ज्यादा जरूरत है, वहीं सीधे मदद पहुंचाई जा सके।


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