बेंगलुरु, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक के भाजपा नेता योगेश गौड़ा हत्याकांड में सजा की अवधि (क्वांटम ऑफ सेंटेंस) को लेकर बेंगलुरु की एमएलए/एमपी विशेष अदालत ने विनय कुलकर्णी समेत 16 दोषियों को हत्या और साजिश के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई। विशेष अदालत ने उन पर 30,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया। बेंगलुरु की जन प्रतिनिधि सभा की विशेष अदालत ने शुक्रवार को भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में दोषी पाए गए कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी और अन्य आरोपियों को सजा सुनाई।
विनय कुलकर्णी पूर्व मंत्री और वर्तमान में कांग्रेस विधायक हैं। अदालत ने गुरुवार को सुनवाई पूरी कर ली थी और फैसला शुक्रवार के लिए सुरक्षित रख लिया था।
अदालत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और दोषी कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी के वकीलों की अंतिम दलीलें पूरी हो गईं। इसके बाद न्यायाधीश संतोष गजानन भट्ट ने मामले को स्थगित करते हुए फैसला सुनाने के लिए शुक्रवार की तारीख तय की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में भावुक माहौल देखने को मिला। दोषियों के परिजन बड़ी संख्या में मौजूद थे और कई लोग रोते हुए नजर आए। कुछ दोषी, जिनमें विधायक विनय कुलकर्णी भी शामिल हैं, अपने परिजनों को सांत्वना देते दिखे।
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही विशेष अदालत ने कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी को भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया। इस मामले में कुलकर्णी आरोपी नंबर 15 हैं और वर्तमान में कर्नाटक अर्बन वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड के अध्यक्ष हैं। अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश का दोषी पाया है।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वी. राजू ने अदालत से आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई निर्मम हत्या थी और मृतक योगेश गौड़ा की हत्या राजनीतिक दुश्मनी के कारण की गई।
उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में कुछ अन्य लोगों ने आत्मसमर्पण किया था, लेकिन सीबीआई जांच के बाद सच्चाई सामने आई। आरोप है कि विधायक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पुलिस तंत्र को प्रभावित किया और सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के दौरान योगेश गौड़ा की आंखों में मिर्च पाउडर डाला गया और फिर उनकी निर्मम हत्या की गई। मामले में दस्तावेजों को फर्जी बनाने और सबूत मिटाने के प्रयास भी किए गए।
–आईएएमएस
एमएस/
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