NHRC Action on TCS Nashik Case: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज(TCS) के नासिक कार्यालय में कथित धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के मामले पर गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने इस पूरे मामले में महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) समेत कई संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग के अनुसार, 11 अप्रैल 2026 को मिली शिकायत को 17 अप्रैल को संज्ञान में लिया गया। शिकायत “कानूनी अधिकार वेधशाला” की ओर से दी गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि नासिक स्थित TCS कार्यालय में धर्मांतरण और यौन शोषण से जुड़ा एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है।
NHRC Action on TCS Nashik Case: NHRC ने लिया संज्ञान
National Human Rights Commission writes to various departments, including Maharashtra DGP, in connection with the issue of alleged religious conversion and sexual harassment at the TCS Nashik office.
The letter reads, “The complainant, representing the Legal Rights… pic.twitter.com/AFUsGKe2a8
— ANI (@ANI) April 17, 2026
NHRC ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार के डीजीपी, नासिक के पुलिस आयुक्त, श्रम आयुक्त और TCS के शीर्ष प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे मामले की जांच कर तय समय के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) आयोग को सौंपें।
आयोग ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण संस्थानों से जवाब तलब किया है। इनमें पुलिस प्रशासन, श्रम विभाग और कंपनी प्रबंधन शामिल हैं। खास तौर पर श्रम आयुक्त से यह भी कहा गया है कि वे भारत में TCS की सभी शाखाओं, बीपीओ, सहायक और सहयोगी कंपनियों का पूरा विवरण उपलब्ध कराएं। इस कदम का उद्देश्य यह समझना है कि कहीं इस तरह की शिकायतें अन्य जगहों से भी तो सामने नहीं आ रही हैं।
क्या है मामला?
यह मामला तब सामने आया जब TCS के नासिक कार्यालय में काम करने वाले आठ महिला और एक पुरुष कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाए। शिकायत के अनुसार, कर्मचारियों के साथ मानसिक और यौन उत्पीड़न किया गया। पीड़ितों का कहना है कि उन पर कुछ धार्मिक गतिविधियों को अपनाने के लिए दबाव डाला गया। इसमें नमाज पढ़ने, खान-पान की आदतें बदलने और यहां तक कि धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर करने जैसे आरोप शामिल हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि कर्मचारियों पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया, जिससे वे अपनी इच्छा के खिलाफ कुछ खास धार्मिक प्रथाओं को अपनाएं।
मामले के सामने आने के बाद TCS प्रबंधन ने इसे गंभीरता से लिया है। कंपनी के चेयरमैन ने बयान जारी कर कहा कि आरोप बेहद चिंताजनक हैं और इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। सच्चाई का पता लगाने के लिए कंपनी ने आंतरिक स्तर पर उच्च स्तरीय जांच शुरू की है। इस जांच की जिम्मेदारी कंपनी की मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) Aarthi Subramanian को सौंपी गई है। कंपनी ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जांच और SIT की भूमिका
इस मामले की जांच नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) भी कर रही है। शुरुआती जांच में Nida Khan को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में चिन्हित किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने कुछ कर्मचारियों को पहले दोस्ती और प्रेम संबंधों के जरिए अपने प्रभाव में लिया। इसके बाद उन पर मानसिक दबाव बनाकर उनका शोषण किया गया।
जीवनशैली बदलने के आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ पीड़ितों को उनके पहनावे और जीवनशैली में बदलाव करने के लिए प्रभावित किया गया। आरोप है कि उन्हें धीरे-धीरे एक विशेष धार्मिक ढांचे में ढालने की कोशिश की गई। इस तरह के आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि इसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात सामने आ रही है।
अब सभी की नजर NHRC की कार्रवाई और पुलिस जांच पर टिकी है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल एक कंपनी बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर सकता है। आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल, यह मामला जांच के अधीन है और सभी संबंधित एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही हैं।


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