Delhi News : उपभोक्ताओं के हक में पारित आदेशों को नजरअंदाज करना पार्श्वनाथ डेवलपर्स के दो निदेशकों को भारी पड़ गया। बकाया भुगतान नहीं करने और आयोग के आदेशों का लगातार पालन न करने पर 4 नवंबर को दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कंपनी के निदेशक संजीव कुमार जैन और राजीव जैन को 18 नवंबर 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक शिकायतकर्ता को भुगतान नहीं मिला जाता और दिए गए चेक क्लियर न हो जात तब तक समझौते के आधार पर आदेश की कार्रवाई वापस नहीं ली जाएगी। पुलिस ने दोनों निदेशकों 46 अलग-अलग निष्पादन के मामलों में गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल ले गए थे। बुधवार को पुलिस ने दोनों को आयोग की अध्यक्ष संगीता ढींगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी की पीठ के सामने पेश किया।
दरअसल, पार्श्वनाथ डेवलपर्स ने शिकायतकर्ता अभिषेक मुंधड़ा के साथ समझौता किया था। कंपनी के निदेशकों ने आयोग को बताया कि मुंधड़ा को 25-25 लाख रुपये के पांच पोस्ट डेटेड चेक दिए गए हैं, जो 3 दिसंबर 2026 से 3 अप्रैल 2027 तक हर महीने की तीन तारीख को देय हैं। शिकायतकर्ता ने चेक आयोग के समक्ष पेश करने के बाद वापस ले लिए थे। इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने 3 नवंबर को आवेदन देकर समझौते के बाद निष्पादन की कार्रवाई वापस लेने की मांग की थी। हालांकि, आयोग की अध्यक्ष संगीता ढींगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी की पीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
पीठ ने कहा कि समझौते की लिखित प्रति रिकॉर्ड पर नहीं है और शिकायतकर्ता को वास्तविक भुगतान भी नहीं मिला है। ऐसे में केवल भविष्य की तारीखों के चेक के आधार पर कार्रवाई समाप्त नहीं की जा सकती। आयोग ने यह भी कहा कि निदेशकों द्वारा पहले जारी किए गए चेक कई मामलों में बाउंस हो चुके हैं और वह कानूनी प्रक्रिया से बचते रहे हैं। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए सभी संबंधित शिकायतकर्ताओं को 18 नवंबर की सुनवाई के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
कई मामलों में गिरफ्तारी वारंट, सात में भगोड़ा घोषित
आयोग के आदेश में दोनों निदेशकों के खिलाफ लंबित मामलों की लंबी फेहरिस्त भी सामने आई है। निदेशक के खिलाफ पांच निष्पादन मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी हैं, जबकि सात मामलों में उन्हें पहले ही भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा 34 अन्य मामलों में उन्हें उद्घोषित अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। आयोग के अनुसार, इन मामलों में डिक्री की रकम का भुगतान नहीं होने और निष्पादन याचिकाएं लंबित रहने के चलते स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई की गई है।


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