TCS, Infosys में धर्मांतरण विवाद के बाद अब Tech Mahindra पर गिरी गाज! रमजान की इफ्तार पार्टी से जुड़ा है मामला

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Tech Mahindra controversy Case: TCS, Infosys कंपनी में धर्मांतरण का मामला सामने आने के बाद अब टेक महिंद्रा का नाम भी चर्चा में है। दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में दावा किया गया कि मुंबई के गोरेगांव स्थित कंपनी के ऑफिस की कैंटीन को रमजान के दौरान नमाज और इफ्तार के लिए फुटवियर फ्री जोन घोषित किया गया था। पोस्ट के वायरल होते ही यह मामला चर्चा में आ गया और कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, टेक महिंद्रा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि आंतरिक जांच…

Tech Mahindra controversy Case: TCS, Infosys कंपनी में धर्मांतरण का मामला सामने आने के बाद अब टेक महिंद्रा का नाम भी चर्चा में है। दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में दावा किया गया कि मुंबई के गोरेगांव स्थित कंपनी के ऑफिस की कैंटीन को रमजान के दौरान नमाज और इफ्तार के लिए फुटवियर फ्री जोन घोषित किया गया था। पोस्ट के वायरल होते ही यह मामला चर्चा में आ गया और कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

हालांकि, टेक महिंद्रा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि आंतरिक जांच में यह दावा गलत और निराधार पाया गया। कंपनी के अनुसार, वह किसी भी धर्म या समुदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करती और सभी कर्मचारियों को समान और सम्मानजनक वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

Tech Mahindra controversy Case: TCS नासिक केस, गंभीर आरोप और गिरफ्तारी

इस पूरे विवाद की शुरुआत TCS के नासिक मामले से हुई थी, जिसने देशभर का ध्यान खींचा। यहां कुछ कर्मचारियों ने अपने साथ यौन उत्पीड़न, धमकी और धार्मिक मामलों में जबरदस्ती जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने कुल 9 एफआईआर दर्ज की। जांच के दौरान मामला और गंभीर होता गया, जिसके चलते राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) और राज्य की खुफिया एजेंसियों को भी इसमें शामिल किया गया।

अब तक इस मामले में 6 कर्मचारियों और एक एजीएम (असिस्टेंट जनरल मैनेजर) को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक महिला आरोपी अभी फरार बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ वरिष्ठ कर्मचारी अपने जूनियर स्टाफ को निशाना बना रहे थे। इस खुलासे ने कंपनी के आंतरिक माहौल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

इन्फोसिस पुणे केस

टीसीएस के बाद इन्फोसिस का नाम भी विवादों में आया। पुणे स्थित कंपनी की BPM यूनिट को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट वायरल हुईं, जिनमें महिला कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, बाद में ये पोस्ट हटा दी गईं, लेकिन तब तक मामला काफी चर्चा में आ चुका था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इन्फोसिस ने साफ कहा कि कंपनी उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाती है। कंपनी के मुताबिक, हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और उसकी निष्पक्ष जांच की जाती है। साथ ही कर्मचारियों को अपनी बात खुलकर रखने का पूरा अवसर दिया जाता है।

वर्क कल्चर पर उठ रहे सवाल

इन तीनों मामलों ने आईटी सेक्टर के वर्क कल्चर को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। एक तरफ कंपनियां समानता और सम्मान की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ सामने आ रहे आरोप इस दावे को चुनौती देते हैं। हालांकि, यह भी जरूरी है कि किसी भी मामले में पूरी जांच के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाए, क्योंकि कई बार सोशल मीडिया पर अधूरी या गलत जानकारी भी तेजी से फैल जाती है। ऐसे में कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे पारदर्शिता बनाए रखें और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और निष्पक्ष कार्यस्थल सुनिश्चित करें।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।