असम गण परिषद के नेताओं ने भाजपा प्रमुख नितिन नबीन से मुलाकात की

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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। असम विधानसभा चुनाव के कुछ दिनों बाद असम गण परिषद (एजीपी) के वरिष्ठ नेताओं ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। यह मुलाकात भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर निरंतर समन्वय का संकेत है। एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महंता ने भाजपा प्रमुख से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस चर्चा का मुख्य केंद्र चुनाव के बाद की रणनीति और भविष्य के संगठनात्मक तालमेल पर रहा। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अंतर्गत असम…

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। असम विधानसभा चुनाव के कुछ दिनों बाद असम गण परिषद (एजीपी) के वरिष्ठ नेताओं ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। यह मुलाकात भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर निरंतर समन्वय का संकेत है।

एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महंता ने भाजपा प्रमुख से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस चर्चा का मुख्य केंद्र चुनाव के बाद की रणनीति और भविष्य के संगठनात्मक तालमेल पर रहा। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अंतर्गत असम में एजीपी, भाजपा की एक प्रमुख सहयोगी बनी हुई है।

हाल ही में संपन्न हुए असम विधानसभा चुनावों में एजीपी ने एनडीए के सीट-बंटवारे के समझौते के तहत 26 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि भाजपा ने 89 निर्वाचन क्षेत्रों में और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे।

गठबंधन की यह संरचना पिछले चुनावों में अपनाए गए गठबंधन फॉर्मूले की ही निरंतरता को दर्शाती है, जिसमें एजीपी ने उन चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया, जहां उसकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत है।

मौजूदा चुनावों में इस क्षेत्रीय पार्टी के प्रदर्शन पर बारीकी से नजर रखी जा रही है, खासकर 2021 के विधानसभा चुनावों में इसके प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में। 2021 में एजीपी ने भी 26 सीटों पर चुनाव लड़ा था और नौ सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही थी, जिससे 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा में एनडीए की कुल सीटों की संख्या 75 तक पहुंचने में योगदान मिला।

इन नतीजों ने गठबंधन में एक छोटे, लेकिन महत्वपूर्ण सहयोगी के तौर पर एजीपी की भूमिका की फिर से पुष्टि कर दी है।

पिछले कुछ सालों में, असम की कभी सबसे मजबूत क्षेत्रीय ताकत रही एजीपी का चुनावी दायरा भले ही सिकुड़ा हो, लेकिन ऊपरी असम के कुछ इलाकों और वहां के मूल निवासियों के बीच उसका प्रभाव अब भी बना हुआ है।

हाल के चुनावों में भाजपा के साथ उसका गठबंधन उसकी राजनीतिक रणनीति का मुख्य केंद्र रहा है।

इस बैठक को एनडीए के सहयोगी दलों द्वारा एकजुटता बनाए रखने और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी रणनीतियों को फिर से तय करने के चल रहे प्रयासों का एक हिस्सा माना जा रहा है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब असम विधानसभा चुनावों के अंतिम परिणामों का अभी भी इंतजार है।

–आईएएनएस

पीएसके

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