चंडीगढ़, 8 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा नेता अमित मालवीय ने पंजाब में ड्रग्स की समस्या को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की। यह आलोचना संगरूर के एक व्यक्ति की मौत के बाद शुरू हुए राजनीतिक हंगामे के बीच की गई है। इस व्यक्ति ने राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने सार्वजनिक रूप से हेरोइन की आसानी से उपलब्धता का मुद्दा उठाया था।
इस घटना ने एक बार फिर ड्रग्स के संकट को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विपक्षी पार्टियां मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के बहुत ज्यादा प्रचारित ड्रग विरोधी अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रही हैं।
संगरूर जिले के रहने वाले गुलजार सिंह ने जहर खा लिया था। उन्होंने दावा किया था कि अपने गांव में चिट्टा (एक तरह का नशीला पदार्थ) के प्रसार को लेकर चीमा से सार्वजनिक रूप से सवाल पूछने के बाद उन पर दबाव डाला गया था।
उनकी मौत ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। विपक्ष सरकार पर ड्रग की लत से प्रभावित परिवारों की चिंताओं को दूर करने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है।
भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि इस घटना ने पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ सफल लड़ाई लड़ने के सरकार के दावों के पीछे की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है।
उन्होंने मान सरकार पर युवाओं के बीच नशीले पदार्थों को फैलाने के लिए जिम्मेदार सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से निपटने के बजाय प्रचार को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
हालांकि, आप सरकार का कहना है कि उसके ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के कारण ड्रग तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है और ड्रग नेटवर्क को तोड़ा गया है।
आप सरकार ने केंद्र पर पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों और हथियारों की सीमा-पार तस्करी को रोकने में विफल रहने का भी बार-बार आरोप लगाया है।
मालवीय ने एक्स पर लिखा कि दिर्बा निर्वाचन क्षेत्र के टूर बंजारा गांव के निवासी गुलजार सिंह ने आप मंत्री हरपाल सिंह चीमा से उनके दौरे के दौरान ‘चिट्टा’ की बेरोकटोक बिक्री के बारे में सवाल पूछा था। उन्होंने कहा था कि उनका अपना बेटा नशे की लत से जूझ रहा है और उसने परिवार का सामान बेच दिया है।
इसके बाद आप से जुड़े स्थानीय नेताओं ने उन पर दबाव डाला और उन्हें परेशान किया। उन्होंने मांग की कि गुलजार सिंह मंत्री से सवाल पूछने के लिए माफी मांगें। उन्होंने इनकार कर दिया।
जहर खाने से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में गुलजार सिंह ने अपनी दुर्दशा के लिए चार लोगों को जिम्मेदार ठहराया, जिनमें हरपाल चीमा और स्थानीय गांव के नेता शामिल थे। बाद में इलाज के बावजूद उनकी मौत हो गई।
मालवीय ने दावा किया कि यह बेहद परेशान करने वाला है। जो सरकार ड्रग्स की समस्या पर सवाल बर्दाश्त नहीं कर सकती और सवाल उठाने वाले नागरिक को डराती-धमकाती है, उसे जवाब देना होगा। पंजाब जवाबदेही का हकदार है, डराने-धमकाने का नहीं।
इस बीच, संगरूर के एक व्यक्ति की मौत के मामले में पुलिस ने एक सरपंच और दो अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और परेशान करने का मामला दर्ज किया है।
डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (पटियाला रेंज) कुलदीप सिंह चहल ने मीडिया को बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया जाएगा, हालांकि पुलिस ने परेशान करने के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं।
–आईएएनएस
डीकेएम/वीसी
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