केंद्र ने दार्जिलिंग के डीएम और सिलीगुड़ी के सीपी को डेपुटेशन पर मांगा

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कोलकाता, 13 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में पिछले हफ्ते एक अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर हालिया विवादों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जिले से एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी और एक भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी को केंद्रीय डेपुटेशन पर मांगा है। ये अधिकारी दार्जिलिंग के मौजूदा जिला मजिस्ट्रेट मनीष मिश्रा और सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस के कमिश्नर सी सुधाकर हैं। सेक्रेटेरिएट के एक अंदरूनी सूत्र के मुताबिक, इस मामले पर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से राज्य सेक्रेटेरिएट ‘नबन्ना’ तक…

कोलकाता, 13 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में पिछले हफ्ते एक अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर हालिया विवादों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जिले से एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी और एक भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी को केंद्रीय डेपुटेशन पर मांगा है।

ये अधिकारी दार्जिलिंग के मौजूदा जिला मजिस्ट्रेट मनीष मिश्रा और सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस के कमिश्नर सी सुधाकर हैं।

सेक्रेटेरिएट के एक अंदरूनी सूत्र के मुताबिक, इस मामले पर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से राज्य सेक्रेटेरिएट ‘नबन्ना’ तक शुक्रवार को ही एक संदेश पहुंच चुका है।

वैसे, राज्य सरकार ने मिश्रा को दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट के पद से पहले ही मुक्त कर दिया है। उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व विशेष सचिव सुनील अग्रवाल ने नए जिला मजिस्ट्रेट के तौर पर कार्यभार संभाल लिया है।

नियमों के अनुसार, चूंकि राष्ट्रपति देश की संवैधानिक प्रमुख होती हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा या प्रोटोकॉल में किसी भी तरह की लापरवाही होने पर केंद्र सरकार को यह अधिकार मिल जाता है कि वह अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला सके, भले ही राज्य सरकार को इस पर कोई आपत्ति क्यों न हो।

सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस (कैडर) नियम, 1954 के नियम 6(1) की वैधता को बरकरार रखा है। इस नियम के तहत, केंद्र सरकार के पास यह अधिकार सुरक्षित रहता है कि यदि ज़रूरी हो, तो वह आईपीएस अधिकारियों के तबादले और प्रतिनियुक्ति के मामले में राज्य सरकार के फैसले को पलट सके। यदि कोई राज्य सरकार किसी चुने हुए अधिकारी को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए मुक्त करने से इनकार करती है, तो उस अधिकारी को पांच साल तक ऐसी प्रतिनियुक्ति पर जाने से रोका जा सकता है।

इस तरह के घटनाक्रम संबंधित आईपीएस अधिकारी की करियर ग्रोथ में बाधा डाल सकते हैं, क्योंकि 2011 बैच या उसके बाद के अधिकारियों के लिए इंस्पेक्टर जनरल के तौर पर पैनल में शामिल होने के योग्य बनने के लिए कम से कम दो साल का केंद्रीय डेपुटेशन अनिवार्य है।

राष्ट्रपति ने 7 मार्च को सिलीगुड़ी में अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन में हिस्सा लिया। हालांकि, उनकी यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल के उल्लंघन की शिकायतें मिलीं और यहां तक कि राष्ट्रपति ने भी इस मामले पर हल्की नाराजगी जाहिर की। यह आरोप भी लगाए गए कि उनकी सुरक्षा के संबंध में प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।

–आईएएनएस

पीएसके

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