केरल के एडीजीपी अजीत कुमार मामले में एसआईटी ने सौंपी संशोधित जांच रिपोर्ट

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तिरुवनंतपुरम, 17 जुलाई (आईएएनएस)। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अलाप्पुझा बचाव अभियान से जुड़े विवादित मामले में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम.आर. अजित कुमार के खिलाफ अपनी जांच को और मजबूत किया है। इसके बाद सरकार पर इस मामले में फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले का राज्य की पुलिस व्यवस्था और शीर्ष नेतृत्व पर दूरगामी असर पड़ सकता है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी संशोधित जांच रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम.आर. अजित कुमार का स्पष्ट रूप से नाम लिया गया है। साथ ही,…

तिरुवनंतपुरम, 17 जुलाई (आईएएनएस)। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अलाप्पुझा बचाव अभियान से जुड़े विवादित मामले में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम.आर. अजित कुमार के खिलाफ अपनी जांच को और मजबूत किया है। इसके बाद सरकार पर इस मामले में फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले का राज्य की पुलिस व्यवस्था और शीर्ष नेतृत्व पर दूरगामी असर पड़ सकता है।

विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी संशोधित जांच रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम.आर. अजित कुमार का स्पष्ट रूप से नाम लिया गया है। साथ ही, अतिरिक्त सबूतों के आधार पर उनके खिलाफ जांच के निष्कर्षों को और मजबूत किया गया है।

यह संशोधित रिपोर्ट तब तैयार की गई, जब राज्य पुलिस प्रमुख (एसपीसी) रावाडा चंद्रशेखर ने जांच से जुड़े पांच अहम बिंदुओं पर और स्पष्ट जानकारी मांगी। इसके बाद उन्होंने 23 जून को सौंपी गई मूल जांच रिपोर्ट वापस भेज दी थी।

आगे की जांच के बाद एसआईटी ने इन सभी सवालों का जवाब अपनी संशोधित रिपोर्ट में दिया और उसे फिर से सौंप दिया। इसके बाद राज्य पुलिस प्रमुख (एसपीसी) के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम.आर. अजित कुमार से स्पष्टीकरण मांगने का रास्ता साफ हो गया है। इसके बाद वह अपनी सिफारिशें गृह विभाग को भेज सकेंगे।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी होने की उम्मीद है।

अगर एडीजीपी एम.आर. अजित कुमार संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सकती है। ऐसी स्थिति में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर उनके प्रमोशन पर भी असर पड़ सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब इसका विशेष महत्व माना जा रहा है।

मौजूदा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। डीजीपी पद के लिए जिन अधिकारियों के नाम पर विचार किया जा रहा है, उनमें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम.आर. अजित कुमार सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं।

इससे पहले अगर उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है, तो पुलिस के सर्वोच्च पद पर उनकी पदोन्नति रुक सकती है।

यह विवाद मुख्यमंत्री के लिए भी राजनीतिक रूप से बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

टीवी चैनल वी.डी. सतीसन के पुराने वीडियो बार-बार दिखा रहे हैं। इन वीडियो में वह विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में तत्कालीन पिनाराई विजयन सरकार की कड़ी आलोचना करते नजर आ रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार ने ऐसे ही मामलों में कार्रवाई करने में देरी की थी।

सतीशन के पुराने बयान फिर से सामने आने के बाद सरकार पर सवाल उठने लगे हैं। एसआईटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई में हुई देरी को लेकर सरकार अब विपक्ष के निशाने पर है।

इस बीच, कांग्रेस के सहयोगी संगठनों ने आरोप लगाया है कि पार्टी का एक धड़ा एडीजीपी एम.आर. अजित कुमार के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम रुख अपना रहा है। उनका दावा है कि इसी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई में देरी हो रही है।

इन आरोपों के बाद सरकार से जल्द कार्रवाई करने की मांग और तेज हो गई है। ऐसे में आने वाले दिन एडीजीपी एम.आर. अजित कुमार के करियर और पुलिस की जवाबदेही के मामले में राज्य सरकार की विश्वसनीयता, दोनों के लिए अहम माने जा रहे हैं।

–आईएएनएस

एसएचके/पीएम

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