नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश से अपनी राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उम्मीद की जा रही है कि गुरुवार को कोर्ट की वेकेशन बेंच के सामने इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए इसे उठाया जाएगा।
यह कदम भाजपा की आपत्तियों के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नटराजन के नामांकन पत्र रद्द करने के बाद उठाया गया है। सत्ताधारी पार्टी का दावा है कि कांग्रेस नेता ने अपने नामांकन पत्रों के साथ दिए गए हलफनामे में तेलंगाना में चल रहे एक कानूनी मामले के बारे में जानकारी नहीं दी थी।
नटराजन के नामांकन के खिलाफ दायर आपत्ति के अनुसार, पूर्व कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव ए श्रीलता ने चौथे अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया था, जिन पर श्रीलता ने छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालांकि, नटराजन ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है और हैदराबाद की अदालत में श्रीलता की याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि यह उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।
इससे पहले बुधवार को नटराजन ने आरोप लगाया था कि रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) सरकार के इशारे पर काम कर रहे थे।
नटराजन मध्य प्रदेश से कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार थीं, लेकिन भाजपा की ओर से एक बड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद उनके नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए। भाजपा का आरोप था कि उन्होंने तेलंगाना की अदालत में लंबित एक मामले के बारे में जानकारी छिपाई थी।
आईएएनएस से बातचीत में नटराजन ने कहा, “हम एक ऐसे रणक्षेत्र में हैं जहां कांग्रेस नेता न सिर्फ विपक्षी पार्टी के खिलाफ लड़ रहे हैं। दुर्भाग्य से हमारे संविधान बनाने वाले पूर्वजों ने जो संस्थाएं बनाई थीं, उनका अब अनादर हो रहा है और वे इस तरह से प्रभावित दिखती हैं कि हमें लगता है कि हम उनके खिलाफ भी लड़ रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि कोई फॉर्म भरना कैसे नहीं जान सकता? इसमें कुछ भी कानूनी या तकनीकी नहीं है। यह सिर्फ राजनीतिक दुर्भावना है, जो हमने कल हर कदम पर देखी कि कैसे लोकतंत्र को कमज़ोर करने की कोशिशें की जा रही थीं।
भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहूंगी कि कल रिटर्निंग ऑफिसर निष्पक्ष नहीं थे। वे मौजूदा सरकार के प्रवक्ताओं और उनके फ्रंटल संगठनों के प्रमुखों की तरह काम कर रहे थे।
–आईएएनएस
पीएसके
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