चेन्नई, 17 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) गुरुवार से राज्यव्यापी अभियान शुरू करेगी। इस अभियान का उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा जनगणना के दौरान जातीय आंकड़े एकत्र करने के प्रस्तावित तरीके की उन कमियों को उजागर करना है, जिन्हें पार्टी गंभीर खामियां मानती है।
कांग्रेस का कहना है कि जनगणना में जाति आधारित आंकड़े जुटाने की प्रस्तावित प्रक्रिया सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति को सही ढंग से सामने लाने में पर्याप्त नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी राज्यभर में लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाएगी।
टीएनसीसी अध्यक्ष और विरुधुनगर से सांसद मणिकम टैगोर ने बताया कि यह अभियान तमिलनाडु के 10 बड़े शहरों में जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों के जरिए चलाया जाएगा। कांग्रेस केंद्र के ओपन-एंडेड सवालों से जाति की जानकारी लेने के तरीके का विरोध करेगी और पहले से तय समुदायों की सूची पर आधारित ड्रॉप-डाउन सिस्टम की वकालत करेगी। पार्टी का मानना है कि इससे सामाजिक न्याय की नीतियां बनाने के लिए ज्यादा भरोसेमंद डेटा मिलेगा।
अएआईसीसी महासचिव और तमिलनाडु प्रभारी गुलाम अहमद मीर और द्रविड़र कझगम के अध्यक्ष के. वीरमणि इस अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे।
मणिकम टैगोर ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की वास्तविक आबादी को छिपाकर पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व से रोकने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र ने पहले परिसीमन से जुड़े मुद्दों का हवाला देकर जाति जनगणना को टाल दिया था। अब उसने अनुसूचित जाति और ओबीसी से जुड़ी जाति की जानकारी ओपन-एंडेड सवालों के जरिए जुटाने का प्रस्ताव रखा है और दावा किया है कि ओबीसी समुदायों की कोई व्यापक सूची उपलब्ध नहीं है।
मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि यह पिछड़े समुदायों को राजनीतिक सत्ता, शिक्षा और रोजगार में उनके सही हिस्से से वंचित करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए पहले से स्पष्ट सूची मौजूद है, तो ओबीसी के लिए ओपन-एंडेड फॉर्मेट क्यों प्रस्तावित किया जा रहा है।
जनगणना का दूसरा चरण, जिसमें जाति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी, आरक्षण और कल्याणकारी नीतियों पर इसके असर के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मणिकम टैगोर ने कहा कि पहले से तय ड्रॉप-डाउन लिस्ट से गलतियां कम होंगी, दोहराव रुकेगा और समुदायों का ज्यादा सटीक वर्गीकरण सुनिश्चित होगा।
कांग्रेस नेता ने केंद्र पर कॉर्पोरेट लोन राइट-ऑफ और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों की जानकारी छिपाने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि 2015 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों ने कथित तौर पर अपना कर्ज न चुकाने वाले कॉर्पोरेट कर्जदारों के नाम बताने से इनकार कर दिया था।
उनका दावा है कि 35,716 करोड़ रुपए के राइट-ऑफ में से केवल 28 प्रतिशत ही वसूला गया है। वाम दलों द्वारा आगामी उपचुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने के फैसले पर मणिकम टैगोर ने कहा कि वे उनकी रणनीति पर टिप्पणी नहीं कर सकते। हालांकि, उन्होंने आश्चर्य जताया कि जिन दलों ने विधानसभा में सरकार का समर्थन किया था, उन्होंने अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
–आईएएनएस
वीकेयू/वीसी
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