नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सख्ती की है। बोर्ड ने दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ‘एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस’ (एपीसीडी) लगाने या उन्हें अपग्रेड करने में लापरवाही बरतने वाली औद्योगिक इकाइयों को तुरंत ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करें।
‘वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981’ की धारा 18(1)(बी) के तहत शुक्रवार को जारी एक निर्देश में सीपीसीबी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से कहा है कि वे नियमों का पालन न करने वाले उद्योगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों से उन उद्योगों की पूरी सूची (यूनिट-वार) शेयर करने को कहा है, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और डीपीसीसी को निर्देश दिया गया है कि वे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) निर्देश संख्या 98 के खंड 21(आई) के अंतर्गत आने वाली उन सभी औद्योगिक इकाइयों को तुरंत ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करें, जिन्होंने एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस लगाने या अपग्रेड करने के लिए वर्क ऑर्डर नहीं दिए हैं, और जो ‘पर्याप्तता मूल्यांकन रिपोर्ट’ या छूट प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भी विफल रही हैं।
बोर्डों को यह भी निर्देश दिया गया है कि यदि ऐसी इकाइयां पांच दिनों के भीतर वर्क ऑर्डर देने का संतोषजनक सबूत, या कोई वैध छूट प्रमाण पत्र या ‘पर्याप्तता रिपोर्ट’ पेश करने में विफल रहती हैं, तो उनके खिलाफ ‘संचालन बंद करने के आदेश’ जारी किए जाएं।
नवीनतम निर्देशों के तहत, ऐसी औद्योगिक इकाइयां तब तक बंद रहेंगी, जब तक कि वे जरूरी वर्क ऑर्डर नहीं दे देतीं और अनुपालन के लिए एक विश्वसनीय समय-सीमा जमा नहीं कर देतीं, जिसे संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से स्वीकार कर लिया जाए।
संबंधित बोर्डों को सीपीसीबी को हर हफ्ते स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी। इसमें की गई कार्रवाई का विवरण देना होगा। इस निर्देश के तहत, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और डीपीसीसी को तुरंत इसकी प्राप्ति की पुष्टि करनी होगी और हर हफ्ते सीपीसीबी को की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपनी होगी।
सीपीसीबी ने उद्योगों के पंजीकरण और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को लगाने व उनमें सुधार की स्थिति की निगरानी के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया है।
बता दें कि यह निर्देश 1 अक्टूबर से 50 एमजी/एनएस³ के संशोधित उत्सर्जन मानक लागू होने के बाद आया है। इसके तहत, ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (सीएक्यूएम) के निर्देश संख्या 98 (संशोधित) के दायरे में आने वाले सभी उद्योगों के लिए मानकों का पालन करना अनिवार्य हो गया है।
–आईएएनएस
डीसीएच/
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