कोलकाता, 29 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी शुक्रवार को राज्य सचिवालय नबन्ना में एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें राज्य में जनगणना प्रक्रिया को तेज करने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी।
सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में गठित नए मंत्रिमंडल की 11 मई को हुई पहली बैठक में जनगणना प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने जनगणना कार्य पूरा करने के लिए विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपते हुए एक अधिसूचना जारी की। जिला स्तर पर, संभागीय आयुक्तों, जिला मजिस्ट्रेटों, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेटों, उप-मंडल मजिस्ट्रेटों, ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) और संयुक्त बीडीओ को इस कार्य के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।
शहरी या नगरपालिका क्षेत्रों में आयुक्तों, अतिरिक्त आयुक्तों, नगरपालिका कार्यकारी अधिकारियों और समकक्ष रैंक के अधिकारियों को जनगणना का कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब शुक्रवार को मुख्यमंत्री अधिकारी कार्य की प्रगति की समीक्षा करने और प्रक्रिया में तेजी लाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
हालांकि कुछ समय पहले कई राज्यों में जनगणना कराने के लिए प्रारंभिक तैयारी का काम शुरू हो गया था, लेकिन राज्य में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नई सरकार के सत्ता में आने तक यह प्रक्रिया रुकी रही।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली और तृणमूल कांग्रेस शासित पिछली राज्य सरकार पर इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को आवश्यक सहयोग न देने का आरोप लगाया है, जिसके कारण राज्य में जनगणना प्रक्रिया की शुरुआत में देरी हुई है।
राज्य सचिवालय के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री अधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में चर्चा का मुख्य एजेंडा जनगणना की तैयारी, प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कर्मचारियों की भर्ती और नियुक्ति, प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों का प्रशिक्षण, डाटा संग्रह विधियों की पहचान और इस मामले में केंद्र सरकार के साथ सुचारू और प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के तरीके होंगे।
राज्य सचिवालय के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, “डिजिटल रूप से डाटा एकत्र करने की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है।”
पश्चिम बंगाल के जनगणना संचालन निदेशालय ने यह भी कहा है कि जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाने के बाद एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करेंगे।
इसमें स्वयं-गणना की सुविधा का विकल्प भी होगा। इसमें इच्छुक लोग सरकारी पोर्टल के माध्यम से स्वेच्छा से अपनी जानकारी ऑनलाइन जमा कर सकेंगे।
इसके बाद एक ‘स्व गणना आईडी’ जनरेट होगी, जिसका उपयोग बाद में सत्यापन के लिए किया जा सकता है। गणनाकर्ता आधिकारिक डाटा एकत्र करेंगे और उसे एक केंद्रीय डेटाबेस या भंडार में अपलोड करेंगे।
–आईएएनएस
एसएके/वीसी
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