गेनबिटकॉइन घोटाले के आरोपी आयुष वार्ष्णेय को 30 मार्च तक की न्यायिक हिरासत

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नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) आयुष वार्ष्णेय को कथित तौर पर कई हजार करोड़ रुपए के ‘गेनबिटकॉइन’ क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में 30 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद, वार्ष्णेय को राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। सीबीआई इस कथित घोटाले की जांच कर रही है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 20 हजार करोड़ रुपए है। यह जांच एक कथित पोंजी स्कीम से जुड़ी है, जिसने क्रिप्टोकरेंसी निवेश से…

नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) आयुष वार्ष्णेय को कथित तौर पर कई हजार करोड़ रुपए के ‘गेनबिटकॉइन’ क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में 30 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद, वार्ष्णेय को राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। सीबीआई इस कथित घोटाले की जांच कर रही है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 20 हजार करोड़ रुपए है।

यह जांच एक कथित पोंजी स्कीम से जुड़ी है, जिसने क्रिप्टोकरेंसी निवेश से असामान्य रूप से ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया था, लेकिन कथित तौर पर निवेशकों से जमा की गई रकम का गलत इस्तेमाल किया। सीबीआई के अनुसार, वार्ष्णेय को मुंबई हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने तब रोका, जब वह देश छोड़कर श्रीलंका के कोलंबो भागने की कोशिश कर रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि उसे उसके खिलाफ जारी किए गए ‘लुक आउट सर्कुलर’ के आधार पर हिरासत में लिया गया और बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ़्तार किया और कोर्ट में पेश किया। जांच ​​एजेंसी ने बताया कि इस मामले में यह पहली गिरफ्तारी है। यह मामला ‘गेनबिटकॉइन’ स्कीम से जुड़ा है, जो 2015 में शुरू हुई थी।

कथित तौर पर इस स्कीम का नेतृत्व अमित भारद्वाज (अब मृत) ने अपने भाई अजय भारद्वाज और अपने नेटवर्क के साथ मिलकर किया था। सीबीआई ने 13 दिसंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद ‘गेनबिटकॉइन’ से जुड़े आरोपों वाली कई एफआईआर की जांच अपने हाथ में ले ली थी। इस आदेश में एजेंसी को ‘साझी जांच एजेंसी’ के तौर पर काम करने का निर्देश दिया गया था।

जांच के दौरान, डार्विन लैब्स और इसके को-फाउंडर्स, जिनमें वार्ष्णेय, साहिल बागला और निकुंज जैन शामिल हैं, की भूमिका की बारीकी से जांच की गई।

जांचकर्ताओं के अनुसार, कंपनी ने कथित तौर पर एमसीएपी क्रिप्टो टोकन को उसके ईआरसी-20 स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के साथ डेवलप और डिप्लॉय किया, और इस कथित धोखाधड़ी के लिए ज़रूरी तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराया। इस इंफ्रास्ट्रक्चर में कथित तौर पर बिटकॉइन माइनिंग प्लेटफॉर्म, एक बिटकॉइन पेमेंट गेटवे, कॉइन बैंक वॉलेट और गेनबिटकॉइन इन्वेस्टर पोर्टल शामिल थे, जिनका इस्तेमाल इस स्कीम में शामिल लोगों द्वारा किया जाता था।

सीबीआई ने कहा है कि इस मामले में जांच अभी जारी है, और जैसे-जैसे वह इस कथित क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी के पीछे के नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाएगी, वैसे-वैसे और भी गिरफ्तारियां और नए खुलासे होने की संभावना है।

–आईएएनएस

पीएसके

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