दिल्ली: उपराज्यपाल ने स्कूलों की सुरक्षा में भविष्योन्मुखी नजरिया अपनाने पर दिया जोर

Summary :

नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) टीएस संधू ने गुरुवार को स्कूल की सुरक्षा और मजबूती के लिए एक व्यापक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने वाले नजरिए की जरूरत पर जोर दिया। संधू ने पीएचडी हाउस में ‘सेफ स्कूल्स लीडरशिप 2026’ पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज स्कूल सुरक्षा का दायरा सिर्फ भौतिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और आपदा की तैयारी भी शामिल है। उपराज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का मकसद ऐसा माहौल बनाना है जहां युवा…

नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) टीएस संधू ने गुरुवार को स्कूल की सुरक्षा और मजबूती के लिए एक व्यापक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने वाले नजरिए की जरूरत पर जोर दिया।

संधू ने पीएचडी हाउस में ‘सेफ स्कूल्स लीडरशिप 2026’ पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज स्कूल सुरक्षा का दायरा सिर्फ भौतिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और आपदा की तैयारी भी शामिल है।

उपराज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का मकसद ऐसा माहौल बनाना है जहां युवा मन सीख सकें, आगे बढ़ सकें और अपनी क्षमता को पहचान सकें; यह प्रक्रिया सुरक्षा की बुनियादी भावना के बिना संभव नहीं है।

इस दौरान एलजी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन शब्दों का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का एक सशक्त माध्यम है।’ उपराज्यपाल ने कहा कि इस सोच को तभी साकार किया जा सकता है जब हर बच्चे को सुरक्षित और बेहतर माहौल में सीखने का अवसर मिले।

इस मौके पर संधू ने ‘नेशनल मॉडल स्कूल सेफ्टी टूलकिट’ भी लॉन्च की। उन्होंने इसे स्कूलों में बचाव और तैयारी की संस्कृति को संस्थागत बनाने की दिशा में एक अहम कदम बताया।

एलजी ने स्कूल लीडर्स से कहा कि वे सुरक्षा को सिर्फ नियमों को पूरा करने की जरूरत न समझें, बल्कि इसे संस्थागत नेतृत्व का एक जरूरी हिस्सा मानें। इसके लिए नियमित सुरक्षा ऑडिट, आपातकालीन तैयारी की योजनाएं, समय-समय पर मॉक ड्रिल, ट्रेंड स्टाफ और स्कूलों, सरकारी एजेंसियों व स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है।

उन्होंने डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, शुरुआती चेतावनी सिस्टम और डेटा-आधारित जोखिम आकलन के जरिए सुरक्षित स्कूल बनाने में टेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका का भी जिक्र किया। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टेक्नोलॉजी के साथ-साथ इंसानी तैयारी और प्रतिबद्ध नेतृत्व का होना भी जरूरी है।

उपराज्यपाल ने उम्मीद जताई कि यह समिट सभी संबंधित पक्षों की उस साझा प्रतिबद्धता को फिर से दोहराएगी, जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जाए कि हर स्कूल ऐसी जगह बने जहां बच्चे बिना किसी डर के सीखें, उनमें आत्मविश्वास बढ़े और वे भविष्य के अवसरों व चुनौतियों के लिए तैयार हों।

–आईएएनएस

एमएस/

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.