सिकंदराबाद शस्त्रागार चोरी का खुलासा, सेवानिवृत्त सेना जवान गिरफ्तार, सभी हथियार बरामद

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हैदराबाद, 11 सितंबर (आईएएनएस)। पिछले महीने सिकंदराबाद कैंटोनमेंट स्थित मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से हथियार और गोला-बारूद चोरी करने के मामले में एक सेवानिवृत्त सेना कर्मी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान उप्पुथोला मल्लेश के रूप में हुई है, जो मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन में हवलदार (एनसीओ) के पद पर तैनात था। उसे बोलारम पुलिस ने हैदराबाद टास्क फोर्स और एसओटी मल्काजगिरि कमिश्नरेट के साथ संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सीवी आनंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 20वीं बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के कोटे और मैगजीन से चोरी किए गए सभी हथियार और…

हैदराबाद, 11 सितंबर (आईएएनएस)। पिछले महीने सिकंदराबाद कैंटोनमेंट स्थित मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से हथियार और गोला-बारूद चोरी करने के मामले में एक सेवानिवृत्त सेना कर्मी को गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान उप्पुथोला मल्लेश के रूप में हुई है, जो मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन में हवलदार (एनसीओ) के पद पर तैनात था। उसे बोलारम पुलिस ने हैदराबाद टास्क फोर्स और एसओटी मल्काजगिरि कमिश्नरेट के साथ संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सीवी आनंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 20वीं बटालियन, मद्रास रेजिमेंट के कोटे और मैगजीन से चोरी किए गए सभी हथियार और गोला-बारूद बरामद कर लिए गए हैं।

बरामद हथियारों में चार एके-203 असॉल्ट राइफल, उनकी पांच मैगजीन, एक इंसास राइफल और उसकी तीन मैगजीन, छह 9 एमएम पिस्टल और उनकी 12 मैगजीन, एक 6.35 बोर की पिस्टल और उसकी मैगजीन, एक नाइट विजन बाइनाक्युलर, 9 एमएम पिस्टल की 1,156 गोलियां, एके-203 की 720 गोलियां तथा इंसास राइफल के लिए 5.56 एमएम की गोलियां शामिल हैं।

यह मामला बेहद सनसनीखेज माना गया क्योंकि इस क्षेत्र के इतिहास में इतनी बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद पहले कभी चोरी नहीं हुए थे। इस संबंध में बोलारम थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

डीजीपी ने कहा कि प्रारंभिक जांच में चोरी की वजह सेना से समय से पहले सेवानिवृत्ति को लेकर आरोपी की नाराजगी प्रतीत होती है।

उन्होंने कहा कि पहली नजर में मल्लेश ने यह अपराध अकेले किया लगता है, लेकिन यह पता लगाने के लिए जांच जारी है कि इसमें कोई और भी शामिल था या नहीं।

डीजीपी आनंद ने कहा कि फिलहाल आरोपी के हथियार तस्करों से संबंध होने की संभावना कम दिखती है, हालांकि सेना के अधिकारी इस पहलू की आगे जांच करेंगे।

37 वर्षीय मल्लेश ने 30 और 31 अगस्त की रात को इस चोरी को अंजाम दिया था।

नागरकर्नूल जिले के अमराबाद क्षेत्र के जंगमरेड्डीपल्ली गांव का निवासी मल्लेश वर्ष 2010 में सेना में भर्ती हुआ था। उसने 16 वर्षों तक सेवा की और अनुशासनहीनता तथा खराब स्वास्थ्य के आधार पर इस वर्ष 30 जून को सेवानिवृत्त हुआ।

डीजीपी ने कहा कि तेलंगाना पुलिस ने इस मामले को बड़ी चुनौती के रूप में लिया था और इसकी सफलता मल्काजगिरि पुलिस जोन, हैदराबाद सिटी पुलिस टास्क फोर्स और राज्य खुफिया विभाग के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा, “शुरुआती जांच में यह अंदरूनी व्यक्ति का काम लग रहा था, क्योंकि बाहरी व्यक्ति के लिए वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल था। घटनास्थल की जांच से भी अंदरूनी साजिश के संकेत मिले।”

जांच एजेंसियों ने उन लोगों की सूची बनाई जिनकी हथियार भंडार तक पहुंच थी। शुरुआत में हथियार और गोला-बारूद के दो प्रभारी कर्मचारी मुख्य संदिग्ध थे, लेकिन उनसे पूछताछ में कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।

इसके बाद जांचकर्ताओं ने शस्त्रागार तक पहुंच रखने वाले लोगों की पहचान की। इनमें मुख्यालय कोर के 10 सदस्य, गोला-बारूद कोर के छह सदस्य, सात सदस्यीय क्यूआरटी टीम, ठेके पर काम करने वाले बिजली मिस्त्री, प्लंबर और अन्य कर्मचारी, दंडित किए गए 34 सदस्य, अवकाश पर गए कर्मचारी और हाल के महीनों में सेवानिवृत्त हुए सात लोग शामिल थे। सभी को निगरानी सूची में रखा गया।

डीजीपी ने बताया कि खुफिया एजेंसियों ने करीब 8.5 लाख मोबाइल नंबरों का विश्लेषण भी किया। जब पूछताछ और जांच से कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला तो जांच को ड्रग माफिया और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य पहलुओं की दिशा में भी बढ़ाया गया।

तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल फॉरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज, फिंगरप्रिंट और कॉल ट्रैकिंग के जरिए जांचकर्ताओं ने संदिग्धों की सूची को सीमित किया और आखिरकार हाल ही में सेवानिवृत्त हुए दो लोगों पर संदेह केंद्रित हुआ।

इनमें से एक मल्लेश था, जो सिकंदराबाद कैंटोनमेंट के बालाजीनगर में अपने परिवार के साथ रह रहा था। 27 अगस्त से लेकर घटना वाले दिन तक उसकी गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं और उसके बयान से मेल नहीं खा रही थीं।

डीजीपी के अनुसार, 7 सितंबर को उसे नागरकर्नूल पुलिस स्टेशन लाया गया, लेकिन उसने अपनी गतिविधियों के बारे में जानकारी नहीं दी। बाद में पूछताछ के लिए बुलाने पर उसके नहीं आने से उस पर संदेह और गहरा गया।

मल्लेश के मोबाइल फोन की जांच में पाया गया कि उसने सभी चैट और कॉल रिकॉर्ड डिलीट कर दिए थे। 10 सितंबर को जब उसे हैदराबाद स्थित टास्क फोर्स कार्यालय ले जाया जा रहा था, तब उसने अपराध स्वीकार कर लिया।

जांच में पता चला कि 27, 28 और 29 अगस्त को उसने शस्त्रागार की रेकी की थी। 30 अगस्त की रात वह बाइक से अपने घर से निकला, परिसर में घुसकर ताला तोड़ा और हथियार तथा गोला-बारूद चोरी कर लिया।

वह सामान को बाइक पर ले जाकर करीब दो किलोमीटर दूर एक मंदिर में छिपाकर आया। बाद में उसे याद आया कि वह मैगजीन कवर वहीं छोड़ आया है, इसलिए वह दोबारा परिसर में गया और उसे भी ले आया।

सुबह 4:33 बजे वह अपने घर पहुंचा और मैगजीन कवर कार में रखा। इसके बाद मंदिर पहुंचकर हथियार कार में लादे और अच्चमपेट के लिए रवाना हो गया। उसने हथियार और गोला-बारूद अपने घर के पास एक स्थान पर छिपा दिए।

6 सितंबर को उसने हथियारों को उसी जिले के एक अन्य घर में ले जाकर रखा, लेकिन 8 सितंबर को फिर वापस पहले वाले स्थान पर ले आया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी के कबूलनामे के बाद सभी चोरी किए गए हथियार और गोला-बारूद बरामद कर लिए गए हैं।

–आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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IANS Agency

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