90 फीसदी महाराष्ट्र पर सूखे का संकट मंडराया, सामना में ठाकरे खेमे का दावा

Summary :

मुंबई, 5 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि दोहरे इंजन वाली सरकार राज्य के बढ़ते कृषि संकट के प्रति उदासीन है, क्योंकि लंबे समय तक सूखे के कारण महाराष्ट्र के बड़े हिस्से सूखे की चपेट में आ रहे हैं। ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र सामना में चेतावनी दी है कि अगर पूर्वानुमान सही साबित होते हैं, तो अगले दो महीनों में राज्य के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से में भीषण सूखे का संकट आ जाएगा। वैश्विक अल नीनो की वजह से देशभर के 350 से अधिक जिलों में…

मुंबई, 5 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि दोहरे इंजन वाली सरकार राज्य के बढ़ते कृषि संकट के प्रति उदासीन है, क्योंकि लंबे समय तक सूखे के कारण महाराष्ट्र के बड़े हिस्से सूखे की चपेट में आ रहे हैं।

ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र सामना में चेतावनी दी है कि अगर पूर्वानुमान सही साबित होते हैं, तो अगले दो महीनों में राज्य के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से में भीषण सूखे का संकट आ जाएगा। वैश्विक अल नीनो की वजह से देशभर के 350 से अधिक जिलों में इसी तरह का सूखा पड़ रहा है, जिससे अनाज और पीने के पानी की भारी कमी की आशंका बढ़ गई है। संपादकीय में सवाल उठाया गया है कि क्या “दोहरे इंजन” वाली सरकार इस विकट संकट को लेकर चिंतित है।

संपादकीय में इस बात का विस्तार से वर्णन किया गया है कि प्रकृति ने महाराष्ट्र के कृषि समुदाय को किस प्रकार करारा झटका दिया है। राज्य के 36 में से 31 जिलों में बारिश नहीं हुई है, जिससे खड़ी फसलें संकटग्रस्त स्थिति में हैं और खेत सूखकर भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं। छिटपुट हल्की बारिश को छोड़कर, इस क्षेत्र में 30 से 45 दिनों तक सूखा पड़ा रहा है, जिससे स्थानीय किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

हालांकि मानसून से पहले की चेतावनियों में “अल नीनो प्रभाव” के कारण संभावित वर्षा की कमी की आशंका जताई गई थी, संपादकीय में इस बात पर कहा गया कि मौसम वैज्ञानिकों ने भी इसके प्रभाव की भयावहता का कम अनुमान लगाया था। राज्य के 18 जिलों में तो सामान्य मानसून बिल्कुल भी नहीं आया है।

संपादकीय के अनुसार, इस वर्ष मानसून की बारिश लगभग 15 दिन देरी से आई। जून में कम बारिश के बाद जुलाई में भारी वर्षा हुई, जिसके कारण प्रमुख क्षेत्रों में बुवाई में पूरे एक महीने की देरी हुई। मुंबई, पुणे, पश्चिमी महाराष्ट्र और नासिक जैसे क्षेत्रों में जुलाई के दौरान छिटपुट बारिश हुई, लेकिन अगस्त के पहले सप्ताह से पूरे राज्य में बारिश रुक गई और फिर से शुरू नहीं हुई।

वहीं, जुलाई की शुरुआती बारिश से अस्थायी राहत मिली और फसलों की वृद्धि में तेजी आई। हालांकि जैसे ही फसलें अपने महत्वपूर्ण पुष्पन चरण में पहुंचीं। सोयाबीन में फली बनने लगीं, कपास में फली विकसित होने लगीं और मक्का में बालियां उगने लगीं, पानी की आपूर्ति सूख गई।

संपादकीय में कहा गया है कि कुओं वाले किसानों ने जुलाई में जमा हुए जल भंडार का उपयोग करके खेतों की सिंचाई करने का प्रयास किया, लेकिन अब जब वे स्रोत पूरी तरह से समाप्त हो गए हैं। खड़ी फसलों को बचाना लगभग असंभव हो गया है।

संपादकीय में इस बात पर जोर दिया गया कि सिंचाई सुविधाओं से वंचित शुष्क भूमि के किसानों को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। सोयाबीन, कपास, मक्का, अरहर (तुअर) और हल्दी जैसी नकदी फसलें लाखों हेक्टेयर में सूख गई हैं, जबकि उड़द और मूंग जैसी दलहन फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। श्रावण का पारंपरिक महीना, जिसमें आमतौर पर रुक-रुक कर बारिश होती है, कई इलाकों में बिना एक बूंद बारिश के गुजरा दशकों में ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। कभी हरे-भरे खेत पीले पड़ गए हैं, जिससे फसलों की वृद्धि रुक गई है, वित्तीय निवेश नष्ट हो गए हैं और महीनों की मेहनत बेकार हो गई है।

विदर्भ में 50 लाख हेक्टेयर से अधिक और मराठवाड़ा में 48 लाख हेक्टेयर में इस मौसम में बुवाई की गई। फसलों के मुरझाने से परेशान कई इलाकों के किसानों ने आगामी रबी मौसम के लिए जमीन तैयार करने के लिए खड़ी फसलों की जुताई शुरू कर दी है।

हालांकि, सितंबर की शुरुआत में बारिश न होने से चिंता बढ़ रही है कि क्या गेहूं और चना (हरभरा) जैसी शीतकालीन फसलों की बुवाई हो पाएगी। साथ ही, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। खेतों के सूख जाने से किसानों के सामने यह एक कठिन दुविधा खड़ी हो गई है कि अगले सात से आठ महीनों तक पशुओं को खिलाने के लिए ज्वार और मक्का का चारा कैसे जुटाया जाए, संपादकीय में यह बताया गया है।

इस पृष्ठभूमि में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने सरकार से आग्रह किया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के अभूतपूर्व पतन का सामना करने के बावजूद, अनदेखी करने की बजाय तुरंत जल प्रबंधन योजनाएं और सूखा-पूर्व राहत उपाय शुरू किए जाएं।

–आईएएनएस

एसएके/वीसी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.