बेंगलुरु, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद छूट गए पात्र मतदाताओं की पहचान और नामांकन के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश का स्वागत किया है। उन्होंने इसे कांग्रेस या सरकार की नहीं, बल्कि पूरे देश के मतदाताओं की जीत बताया।
निर्वाचन आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, छूट गए और पहली बार पात्र हुए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। आयोग ने नियमित मतदाता सूची अद्यतन प्रक्रिया के जरिए भी नामांकन की सुविधा उपलब्ध कराने को कहा है।
विधान सौध के पास पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने कहा कि यह निर्देश गुरुवार को कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद आया है।
उन्होंने कहा, “हम निर्वाचन आयोग के आदेश का स्वागत करते हैं। यह केवल कांग्रेस और सरकार की जीत नहीं है। यह कर्नाटक और पूरे देश के मतदाताओं की जीत है तथा पात्र मतदाताओं को उनके अधिकारों से वंचित करने के प्रयासों के खिलाफ जीत है।”
शिवकुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए जमा किए गए आवेदनों से जुड़ी शिकायतों का भी संज्ञान लिया है और चुनाव अधिकारियों को ऐसी शिकायतों की जांच करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने बताया कि अधिकारियों को पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के नामांकन के लिए विशेष शिविर आयोजित करने और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ), मुख्य निर्वाचन अधिकारियों तथा जिला निर्वाचन अधिकारियों को फॉर्म-6 और फॉर्म-7 से संबंधित निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बूथ स्तर पर भी शिविर लगाए जाने चाहिए, ताकि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, बेघर लोगों और अन्य कमजोर वर्गों के लोगों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की सुविधा मिल सके। निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के दौरान छूटे मतदाताओं तथा युवा और पहली बार पात्र होने वाले मतदाताओं के नामांकन के लिए भी विशेष उपायों की घोषणा की है।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा के प्रतिनिधियों ने समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया, “यह शर्मनाक है। उनका उद्देश्य समुदायों, जातियों और धर्मों के बीच विभाजन पैदा करना है। उनका उद्देश्य दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के वोट हटाना है।”
भाजपा के विरोध प्रदर्शन को लेकर शिवकुमार ने कहा कि भाजपा नेताओं ने खुद करीब 25 हजार आवेदन जमा करने की बात स्वीकार की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक “आपराधिक साजिश” है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ भी कोई शिकायत है और गलत काम के सबूत हैं तो उसकी जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को चुनाव जीतने के लिए जनता का विश्वास हासिल करना चाहिए था, न कि मतदाता सूची को प्रभावित करने का प्रयास करना चाहिए।
शिवकुमार ने कहा कि नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा करना मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “मतदान का अधिकार लोगों के सम्मान के साथ जीने के अधिकार से जुड़ा है। इसलिए यह डीके शिवकुमार की जीत नहीं है, बल्कि पूरे देश के मतदाताओं की जीत है।”
उन्होंने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अभियान का भी उल्लेख किया। शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस शुरुआत से इस मुद्दे को उठाती रही है और नागरिक समूहों तथा कार्यकर्ताओं ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर आंकड़े जुटाए और कथित अनियमितताओं से संबंधित रिपोर्ट सौंपीं।
उन्होंने मीडिया से इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर सामने लाने की अपील करते हुए मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की मांग की।
गौरतलब है कि कर्नाटक में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जाने को लेकर विवाद चल रहा है। गुरुवार को शिवकुमार के प्रदर्शन के बाद कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जांच प्रक्रिया के तहत जानबूझकर गलत जानकारी देने वाले पाए जाने वाले आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए।
–आईएएनएस
डीएससी
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