वैश्विक तनावों के बीच अगले सप्ताह रेपो रेट या आरबीआई एमपीसी के रुख में बदलाव की संभावना नहीं: विशेषज्ञ

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नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अर्थशास्त्रियों ने शुक्रवार को कहा कि भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अगले हफ्ते होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में इस बार रेपो रेट या पॉलिसी रुख में किसी भी बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह मौजूदा वैश्विक तनाव और अनिश्चितता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आरबीआई का रुख इस बार सतर्क रहेगा और मौजूदा अनिश्चितता के बीच सबसे ज्यादा ध्यान जीडीपी और महंगाई के अनुमान पर होगा, जो मौजूदा हालात में काफी अहम हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनाविस ने कहा, “हम लिक्विडिटी या…

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अर्थशास्त्रियों ने शुक्रवार को कहा कि भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अगले हफ्ते होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में इस बार रेपो रेट या पॉलिसी रुख में किसी भी बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह मौजूदा वैश्विक तनाव और अनिश्चितता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आरबीआई का रुख इस बार सतर्क रहेगा और मौजूदा अनिश्चितता के बीच सबसे ज्यादा ध्यान जीडीपी और महंगाई के अनुमान पर होगा, जो मौजूदा हालात में काफी अहम हैं।

बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनाविस ने कहा, “हम लिक्विडिटी या करेंसी मैनेजमेंट को लेकर किसी नए कदम की उम्मीद नहीं कर रहे हैं, क्योंकि आरबीआई जरूरत पड़ने पर पहले भी ऐसे कदम उठाता रहा है।”

तीन दिन की यह पॉलिसी बैठक 6 अप्रैल से 8 अप्रैल तक चलेगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा संकट बढ़ा है और मार्च में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।

बैंक के अनुसार, अगर महंगाई 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा को पार करती है, तो साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “युद्ध का असर आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर अगले 3-4 महीनों में साफ होगा। इसके बाद आरबीआई ब्याज दरों की दिशा पर फैसला करेगा।”

एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च के अनुसार, इस बार एमपीसी की बैठक पूरी तरह से तेल की कीमतों में आए अचानक झटके को लेकर फैली चिंता को दूर करने के लिए संचार पर केंद्रित होगी।

एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों का कहना है, “हमें उम्मीद है कि आरबीआई अलग-अलग संभावित स्थितियों, संवेदनशीलता और अपनी प्रतिक्रिया पद्धति के व्यापक सिद्धांतों की रूपरेखा प्रस्तुत करेगा। तेल कीमतों में उछाल के बावजूद निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम है, क्योंकि आरबीआई एक साल आगे की महंगाई को ज्यादा महत्व देता है, जो फिलहाल कम दिख सकती है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि अब ब्याज दरों में कटौती का दौर खत्म हो चुका है और आरबीआई लंबे समय तक दरों को स्थिर रख सकता है।

हाल ही में 27 मार्च को आरबीआई ने बैंकों के विदेशी मुद्रा पोजिशन से जुड़े नियमों को सख्त किया था, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि रुपए को संभालने के लिए ब्याज दरों में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि एचएसबीसी का कहना है कि ब्याज दर बढ़ाने की संभावना अभी भी काफी कम है।

–आईएएनएस

डीबीपी

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