एक्सप्लेनर: दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत, जानें क्या हैं प्रमुख वजहें

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नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत 21वीं सदी की सबसे गतिशील आर्थिक सफलता की कहानियों में से एक बनकर उभरा है। देश ने एक विकासशील अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाई है। पिछले दो दशकों में तेज आर्थिक विस्तार, तेजी से डिजिटलाइजेशन और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बना दिया है। यह जानकारी न्यूज.एजेड की एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और आर्थिक विश्लेषकों…

नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत 21वीं सदी की सबसे गतिशील आर्थिक सफलता की कहानियों में से एक बनकर उभरा है। देश ने एक विकासशील अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाई है।

पिछले दो दशकों में तेज आर्थिक विस्तार, तेजी से डिजिटलाइजेशन और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बना दिया है। यह जानकारी न्यूज.एजेड की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार भारत ने हाल के वर्षों में अधिकतर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में लगातार ज्यादा आर्थिक वृद्धि दर दर्ज की है।

जहां कई विकसित अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बाद धीमी वृद्धि से जूझ रही हैं, वहीं भारत अपनी आर्थिक गति को मजबूत बनाए रखने में सफल रहा है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत की इस वृद्धि के पीछे घरेलू मांग में बढ़ोतरी, तकनीकी नवाचार और आर्थिक ढांचे में किए गए सुधार अहम भूमिका निभा रहे हैं।

जब अर्थशास्त्री भारत को सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था कहते हैं, तो वे आमतौर पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर की बात करते हैं, जो यह बताती है कि किसी देश की कुल आर्थिक गतिविधि कितनी तेजी से बढ़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में भारत की जीडीपी वृद्धि दर अक्सर 6 प्रतिशत से अधिक रही है, जो अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है।

आर्थिक उदारीकरण के बाद व्यवसायों को अधिक स्वतंत्रता मिली, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिली। इसके बाद विदेशी कंपनियों ने भारत में निवेश करना शुरू किया, जिससे पूंजी, तकनीक और विशेषज्ञता देश में आई।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने भी उद्योगों में नवाचार और उत्पादकता को बढ़ावा दिया, जिससे लंबे समय में आर्थिक विकास को मजबूती मिली।

भारत की आर्थिक प्रगति में तकनीकी क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। 1990 के दशक के अंत से भारत सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और आईटी सेवाओं का वैश्विक केंद्र बन गया है।

भारत की जनसंख्या संरचना भी आर्थिक वृद्धि में अहम योगदान देती है। देश में दुनिया की सबसे बड़ी और युवा आबादी में से एक है, जो मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों के लिए विशाल कार्यबल उपलब्ध कराती है।

इसके साथ ही घरेलू खपत भी भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा स्तंभ बन चुकी है। बढ़ता मध्यम वर्ग ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, हेल्थकेयर और हाउसिंग जैसे उत्पादों की मांग को बढ़ा रहा है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास ने भी भारत की आर्थिक क्षमता को मजबूत किया है। पिछले एक दशक में सरकार ने हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट और बंदरगाहों के निर्माण में भारी निवेश किया है, जिससे कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स बेहतर हुए हैं।

भारत ने डिजिटल क्षेत्र में भी बड़ी क्रांति देखी है। सरकारी पहल के तहत डिजिटल पहचान प्रणाली और मोबाइल पेमेंट प्लेटफॉर्म का विस्तार हुआ है, जबकि सस्ते स्मार्टफोन और इंटरनेट सेवाओं ने करोड़ों लोगों को ऑनलाइन दुनिया से जोड़ दिया है।

विदेशी निवेश ने भी भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वैश्विक कंपनियां भारत को एक बड़े उपभोक्ता बाजार और लंबे समय तक विकास की संभावनाओं वाले देश के रूप में देखती हैं।

हाल के वर्षों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी तेजी से आगे बढ़ने लगा है। घरेलू उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए सरकार की कई योजनाओं ने कंपनियों को भारत में फैक्ट्रियां लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

इसके अलावा उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) भी भारत के आर्थिक बदलाव का बड़ा कारण बन रही है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बन चुका है, जहां हर साल फिनटेक, हेल्थटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हजारों नई कंपनियां शुरू हो रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा और कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) ने भी आर्थिक विकास को मजबूत आधार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

–आईएएनएस

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