बढ़ा हुआ पीरियड्स लीव कानून शायद प्रैक्टिकल न हो: कर्नाटक के मंत्री संतोष लाड

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बेंगलुरु, 14 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने शनिवार को कहा कि मासिक धर्म के लिए चार से पांच दिन की छुट्टी को कानूनी रूप से अनिवार्य करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो सकता है। उन्होंने इस मुद्दे पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं का समर्थन किया। एक बयान में लाड ने कहा कि उन्होंने महिला कर्मचारियों और छात्राओं के लिए मासिक धर्म की छुट्टी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यह बताया था कि कानून के जरिए चार से पांच दिनों…

बेंगलुरु, 14 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने शनिवार को कहा कि मासिक धर्म के लिए चार से पांच दिन की छुट्टी को कानूनी रूप से अनिवार्य करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो सकता है। उन्होंने इस मुद्दे पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं का समर्थन किया।

एक बयान में लाड ने कहा कि उन्होंने महिला कर्मचारियों और छात्राओं के लिए मासिक धर्म की छुट्टी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यह बताया था कि कानून के जरिए चार से पांच दिनों की मासिक धर्म की छुट्टी लागू करने में व्यावहारिक चुनौतियां आ सकती हैं।

मंत्री ने कर्नाटक सरकार की उस नीति की कोर्ट द्वारा सराहना का स्वागत किया, जिसके तहत सरकारी और निजी, दोनों संस्थानों में महिला कर्मचारियों को हर महीने एक दिन की पेड मासिक धर्म की छुट्टी दी जाती है।

लाड ने कहा कि राज्य सरकार ने विशेषज्ञों, नियोक्ताओं, उद्योगपतियों, उद्यमियों, डॉक्टरों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने के बाद ‘कर्नाटक मासिक धर्म चक्र नीति 2025’ पेश की थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस नीति को लागू करने से पहले इसके फायदों और चुनौतियों की सावधानीपूर्वक जांच की थी।

कोर्ट की उस टिप्पणी का जिक्र करते हुए कि मासिक धर्म की छुट्टी पर देशव्यापी कानून लाने से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं और युवा महिलाओं के लिए कलंक पैदा हो सकता है, उन्होंने कहा कि इस मामले पर सभी संबंधित पक्षों और सरकारों के बीच व्यापक चर्चा होने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कोई भी देशव्यापी मासिक धर्म छुट्टी नीति बनाने से पहले सभी संबंधित पक्षों की राय ली जानी चाहिए, ताकि यह पूरे देश की महिलाओं के लिए उपयुक्त और फायदेमंद हो सके।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया है, जिसमें पूरे देश में चार से पांच दिनों की मासिक धर्म की छुट्टी अनिवार्य करने वाला कानून बनाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

मंत्री संतोष लाड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें पूरे देश में चार से पांच दिनों की मासिक धर्म की छुट्टी देने वाला कानून बनाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।”

उन्होंने कहा, “साथ ही यह उत्साहजनक है कि कोर्ट ने कर्नाटक की प्रगतिशील मासिक धर्म छुट्टी नीति की भी सराहना की है, जिसके तहत सरकारी और निजी, दोनों संस्थानों में महिला कर्मचारियों को हर महीने एक दिन की पेड छुट्टी दी जाती है।”

उन्होंने कहा, “कर्नाटक मासिक धर्म छुट्टी नीति 2025 बनाते समय हमने एक संतुलित, व्यावहारिक और महिलाओं के अनुकूल नीति सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों, नियोक्ताओं, डॉक्टरों, उद्योगपतियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। हमने कर्मचारियों और नियोक्ताओं, दोनों के हितों पर सावधानीपूर्वक विचार किया, जो हमारे समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है।”

मंत्री लाड ने आगे कहा कि अगर व्यापक विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के हितों और गरिमा को ध्यान में रखते हुए कोई उपयुक्त नीति बनाई जाती है तो उसका निश्चित रूप से स्वागत किया जाएगा।

–आईएएनएस

डीके/डीकेपी

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