फाल्टा में दोबारा मतदान: पहले दो घंटों में 20.47 प्रतिशत वोटिंग; बूथों से तृणमूल के पोलिंग एजेंट नदारद

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कोलकाता, 21 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के लिए गुरुवार को हुई पूरी तरह से शांतिपूर्ण पुनर्मतदान प्रक्रिया में सुबह 9 बजे तक के शुरुआती दो घंटों में 20.47 प्रतिशत का उच्च मतदान दर्ज किया गया। फल्टा के 285 पोलिंग बूथ में से किसी से भी हिंसा, तनाव या चुनावी धांधली की एक भी रिपोर्ट सामने नहीं आई। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने पिछले सप्ताह चुनाव से हटने की घोषणा कर दी थी, जिसके चलते पार्टी के पोलिंग एजेंट सभी पोलिंग बूथ से नदारद थे। निर्वाचन क्षेत्र में कहीं भी…

कोलकाता, 21 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के लिए गुरुवार को हुई पूरी तरह से शांतिपूर्ण पुनर्मतदान प्रक्रिया में सुबह 9 बजे तक के शुरुआती दो घंटों में 20.47 प्रतिशत का उच्च मतदान दर्ज किया गया।

फल्टा के 285 पोलिंग बूथ में से किसी से भी हिंसा, तनाव या चुनावी धांधली की एक भी रिपोर्ट सामने नहीं आई।

तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने पिछले सप्ताह चुनाव से हटने की घोषणा कर दी थी, जिसके चलते पार्टी के पोलिंग एजेंट सभी पोलिंग बूथ से नदारद थे। निर्वाचन क्षेत्र में कहीं भी पिछली सत्ताधारी पार्टी का एक भी अस्थायी कैंप कार्यालय नजर नहीं आया।

खान के मुख्य पार्टी कार्यालय के शटर गिरे हुए थे और उन पर ताले लगे थे। वही खान, जिसका आतंक कभी पूरे फल्टा क्षेत्र पर राज करता था। यहां तक कि तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार भी फल्टा के श्रीरामपुर इलाके में स्थित अपने आवास पर मौजूद नहीं थे।

हालांकि, प्रमुख राजनीतिक दलों, यानी भारतीय जनता पार्टी, सीपीआई(एम) और कांग्रेस, के अन्य उम्मीदवारों के एजेंट सभी 285 पोलिंग बूथ पर मौजूद थे।

इन पार्टियों के अस्थायी कैंप कार्यालय भी फल्टा के अलग-अलग हिस्सों में संचालित होते देखे गए, जिनमें भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा निर्धारित संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे।

फिर भी, चुनाव से हटने की घोषणा के बावजूद, खान का नाम ईवीएम पैड पर दिखाई दिया, जिससे उनकी घोषणा महज एक प्रतीकात्मक कदम बनकर रह गई।

सुबह 7 बजे पुनर्मतदान शुरू होने के समय से ही पोलिंग बूथ के सामने मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं। गर्मी की तपिश भी मतदाताओं के उत्साह को कम नहीं कर पाई।

कई मतदाताओं ने दावा किया कि पिछली बार वे 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ही अपना वोट डाल पाए थे; वही चुनाव जिसने 34 साल के वाम मोर्चा शासन का अंत किया और 15 साल के तृणमूल कांग्रेस शासन की शुरुआत की।

कतार में खड़े एक मतदाता ने मीडियाकर्मियों से कहा, “मेरा पूरा परिवार पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस का समर्थक रहा है। लेकिन इसके बावजूद, 2011 के बाद हुए किसी भी चुनाव में हमें वोट डालने की अनुमति नहीं मिली। जहांगीर अपने भरोसेमंद समर्थकों के अलावा किसी पर भी भरोसा नहीं करता था। हम 29 अप्रैल को भी वोट नहीं डाल पाए थे, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दो चरणों में से दूसरे चरण के तहत यहाँ मतदान हुआ था। लेकिन इस बार हम बिना किसी डर के वोट डाल रहे हैं, जिसका श्रेय ईसीआई द्वारा की गई सुरक्षा व्यवस्था को जाता है।”

दोबारा मतदान के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की कुल 35 कंपनियों को तैनात किया गया है, जो किसी एक विधानसभा क्षेत्र के लिए काफी बड़ी संख्या है।

–आईएएनएस

एससीएच/पीएम

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