गांधीनगर, 30 जून (आईएएनएस)। गुजरात की राजधानी गांधीनगर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर्स एजुकेशन (आईआईटीई) के नए कैंपस के विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने 127 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत अत्याधुनिक शैक्षणिक और शोध सुविधाओं के साथ 600 से अधिक छात्रों के लिए छात्रावास का निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को नए कैंपस के निर्माण कार्य का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। यह विश्वविद्यालय वर्ष 2010 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के तहत स्थापित किया गया था।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा, राज्य मंत्री त्रिकम छंगा और रिवाबा जडेजा भी मौजूद रहे।
राज्य सरकार के अनुसार नए परिसर में आधुनिक शैक्षणिक भवन, फैकल्टी ब्लॉक, एडवांस क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाएं, सेमिनार हॉल, अत्याधुनिक पुस्तकालय, संग्रहालय और खेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा 600 से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास भी बनाया जाएगा।
शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने कहा कि यह परियोजना केवल एक भवन के निर्माण की शुरुआत नहीं, बल्कि ऐसे उत्कृष्ट शिक्षकों के निर्माण की नई शुरुआत है, जो भारत के भविष्य को दिशा देंगे। उन्होंने कहा कि भारत को केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि ऐसे राष्ट्रनिर्माता शिक्षकों को तैयार करना चाहिए जो वैश्विक स्तर पर भी शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकें।
उन्होंने बताया कि आईआईटीई की स्थापना विश्वस्तरीय शिक्षक शिक्षा संस्थान के रूप में की गई थी और नई वित्तीय मंजूरी से इसके विस्तार को और गति मिलेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का उल्लेख करते हुए वाजा ने कहा कि गुजरात इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल आधारित शिक्षण पर जोर देती है। इसी उद्देश्य से आईआईटीई को बहुविषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में सात नए स्कूल स्थापित किए गए हैं, जिससे विभिन्न ज्ञान क्षेत्रों का एकीकरण हो सके।
वाजा ने कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र के विकास का सबसे सशक्त माध्यम है और शिक्षक कक्षा से ही राष्ट्र निर्माण की नींव रखते हैं। उन्होंने कहा कि नए परिसर की आधारशिला केवल सीमेंट और कंक्रीट की इमारत की नहीं, बल्कि ‘विकसित गुजरात’ के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है।
राज्य मंत्री त्रिकम छंगा ने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना केवल साक्षरता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ यह संस्थान आने वाले वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षण पद्धति में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा।
कार्यक्रम के दौरान आईटीईपी पाठ्यक्रम का डिजिटल शुभारंभ भी किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विद्यालयी जीवन में उन्हें पढ़ाने वाले वडनगर के श्री बी.एन. हाई स्कूल के शिक्षकों का सम्मान किया गया।
इस समारोह में गांधीनगर की महापौर मीरा पटेल, राज्यसभा सांसद राजेश शुक्ला, विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, शैक्षणिक प्रमुख, निदेशक, प्राचार्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
–आईएएनएस
डीएससी
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