चंडीगढ़, 15 मई (आईएएनएस)। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक एवं एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक स्कैम मामले में गुरुवार को चंडीगढ़ और पंचकुला में सात जगहों पर छापे मारे, जिससे घोटाले में गबन किए गए धन का पता लगाया जा सके। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में शुक्रवार को दी गई।
सीबीआई ने जिन जगहों पर छापेमारी की है, उनमें आवासीय परिसर, वाणिज्यिक परिसर/ज्वेलर्स शोरूम, सरकारी धन के गबन के संदिग्ध लाभार्थियों के परिसर और जांच से जुड़े अन्य निजी संस्थाओं के परिसर शामिल हैं।
तलाशी के दौरान, धोखाधड़ी और संदिग्ध गबन से संबंधित कई आपत्तिजनक दस्तावेज और वस्तुएं बरामद और जब्त की गईं। इनमें वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।
इस मामले में अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सीबीआई ने एक बयान में कहा, “जांच में तेजी लाई गई है और कई सुरागों पर काम किया जा रहा है। सीबीआई इस मामले में जल्द से जल्द व्यापक जांच करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
हरियाणा सरकार ने इस मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंप दी है। आरोप है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके धोखाधड़ी के माध्यम से सरकारी धन का गबन किया।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी का मामला सबसे पहले इस साल फरवरी में सामने आया, जब हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग के एक अधिकारी ने अपना खाता बंद करने और शेष राशि को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का प्रयास किया। इसी छोटे से बैंकिंग लेनदेन के दौरान इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ, जिसमें रिकॉर्ड और वास्तविक शेष राशि में भारी विसंगतियां पाई गईं।
हरियाणा के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज की, लेकिन राज्य सरकार ने बाद में इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया। इसके बाद ईडी ने भी समानांतर जांच शुरू की।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का कहना है कि उसने संबंधित राज्य सरकारी विभागों को 557 करोड़ रुपए लौटा दिए हैं। हालांकि, जांच अभी भी जारी है।
–आईएएनएस
एबीएस
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